नासा का रोमन टेलीस्कोप खोलेगा ब्रह्मांड के कई राज
नासा अपने एक बड़े स्पेस टेलीस्कोप को लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। इसका नाम 'नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप' है। इसका नाम एजेंसी की पहली खगोल विज्ञान प्रमुख डॉ. नैन्सी ग्रेस रोमन के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने इस क्षेत्र में एक अहम भूमिका निभाई थी।
यह अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है, जिस पर पिछले 20 सालों में 4.3 अरब डॉलर (करीब 400 अरब रुपये) से भी ज्यादा का निवेश किया गया है।
एजेंसी इसे 30 अगस्त को लॉन्च करने की योजना बना रही है। इस टेलीस्कोप का मुख्य उद्देश्य ब्रह्मांड के विस्तार को समझना और दूर के ग्रहों (एक्सोप्लैनेट्स) की खोज करना है।
एक लाख एक्सोप्लैनेट्स की खोज का लक्ष्य
रोमन टेलीस्कोप का देखने का दायरा हबल टेलीस्कोप से कम से कम 100 गुना ज्यादा होगा। इससे वैज्ञानिक सिर्फ 5 सालों में एक लाख से ज्यादा एक्सोप्लैनेट्स और अरबों आकाशगंगाओं का सर्वे कर पाएंगे।
इसके सर्वे से हमारी आकाशगंगा मिल्की वे के केंद्र का नक्शा तैयार होगा। साथ ही पूरे ब्रह्मांड का एक विस्तृत 3D नक्शा भी बन पाएगा।
यह टेलीस्कोप उन अकेले घूमने वाले ग्रहों (रॉग प्लैनेट्स) और अलग-थलग पड़े ब्लैक होल्स को भी ढूंढेगा, जो अब तक अज्ञात हैं। इस जानकारी से वैज्ञानिकों को डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और ब्रह्मांड के विस्तार की गति को समझने के लिए नए सुराग मिलेंगे।
लॉन्च से पहले नासा के सेंटर में चल रही जांच
यह टेलीस्कोप पिछले साल दिसंबर में बनकर तैयार हो चुका था। फिलहाल, नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में इसकी अंतिम जांच चल रही है।
इन जांचों के बाद इसे कैनेडी स्पेस सेंटर ले जाया जाएगा, जहां से इसे अंतरिक्ष में लॉन्च किया जाएगा। यह एक महत्वाकांक्षी मिशन है। इसलिए जरूरी है कि लॉन्च से पहले सभी सिस्टम सही तरीके से काम करें और कोई चूक न हो।