नासा के अंतरिक्ष यात्रियों ने ISS पर बनाए लाइसोजाइम के क्रिस्टल
नासा के वैज्ञानिकों ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर लाइसोजाइम के क्रिस्टल बनाने में सफलता पाई है। यह वही प्रोटीन है, जो हमारी आंखों के आंसुओं में भी पाया जाता है।
अंतरिक्ष में मौजूद कम गुरुत्वाकर्षण में खास उपकरणों का इस्तेमाल करके वैज्ञानिक प्रोटीन के बनने के नए और गहरे रहस्यों को जानना चाहते हैं।
धरती पर प्रोटीन की बनावट को समझना बहुत मुश्किल होता है। इस खोज से मेडिकल शोध के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं।
जीवाणुओं से बचाता है लाइसोजाइम
लाइसोजाइम हमारे शरीर को जीवाणुओं से बचाता है। अच्छी तरह से बने क्रिस्टल कैसे बनते हैं, यह दिखाने के लिए इसे एक कंट्रोल कंपाउंड की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
अंतरिक्ष में इसके क्रिस्टल उगाने से गुरुत्वाकर्षण और तलछट (सेडिमेंटेशन) जैसी बाधाएं कम आती हैं। इसी वजह से वैज्ञानिकों को और भी साफ और सटीक नतीजे मिलते हैं।
दवाओं के विकास के लिए यह बहुत बड़ी बात है। इन संरचनाओं को समझने पर ज्यादा असरदार दवाएं बनाई जा सकेंगी। ISS पर पहले भी बीमारियों से जुड़े दूसरे प्रोटीन का अध्ययन किया गया है।