नासा ने मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यात्रियों के खतरा बनी बारीक धूल का लगाया पता
नासा को हाल ही में पता चला है कि मंगल ग्रह केवल लाल रंग का नहीं है, बल्कि वहां मौजूद धूल भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती है।
पर्सिवरेंस रोवर ने अपने साथ ले जाए गए स्पेससूट के नमूनों पर बेहद महीन धूल के कणों का पता लगाया है। इनमें से कुछ कण तो 100 नैनोमीटर जितने छोटे थे।
ये कण इतने छोटे होते हैं कि आसानी से फेफड़ों में घुस सकते हैं और दिमाग तक भी पहुंच सकते हैं। मंगल ग्रह पर रहने वाले या समय बिताने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए यह स्थिति बिलकुल अच्छी नहीं है।
स्पेससूट पर चिपकती है धूल
रोवर ने 4 साल से भी ज्यादा समय तक यह परीक्षण किया कि यह धूल कैलिब्रेशन लक्ष्य पर कैसे चिपकती है। इन लक्ष्य में टेफ्लॉन और बेसाल्टिक ग्लास शामिल थे।
साथ ही स्पेससूट की सामग्री में इस्तेमाल होने वाले टेफ्लॉन और वेक्ट्रन के नमूने भी थे। सामने आया है कि सबसे छोटे कण (इंसान के बाल से लगभग 700 गुना पतले) सतहों से चिपक जाते हैं।
ऐसा लगता है कि स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी इस बात को प्रभावित करती है कि धूल उनसे कितनी मजबूती से चिपकती है। नासा अब ऐसी स्पेससूट सामग्री और सुरक्षात्मक कोटिंग पर विचार कर रही है, जिन पर कम धूल जमा होती है।
साथ ही मंगल ग्रह पर लंबे मिशन के दौरान दूषित स्पेससूट से धूल को रहने वाले स्थानों में आने से रोकने के लिए सूटपोर्ट और ड्यूल-चेंबर एयरलॉक जैसी प्रणालियों पर भी गौर किया जा रहा है।