नासा के आर्टेमिस 2 मिशन की लॉन्च तारीख फिर बढ़ी आगे, आई यह तकनीकी दिक्कत
क्या है खबर?
अंतरिक्ष एजेंसी नासा को आर्टेमिस 2 मिशन की लॉन्च तारीख एक बार फिर आगे बढ़ानी पड़ गई है। पहले यह मिशन 6 मार्च को उड़ान भरने वाला था, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण इसे टाल दिया गया। अब नासा ने अप्रैल के लिए नई लॉन्च विंडो तय की है, जो मिशन की अगली संभावित कोशिश होगी। एजेंसी ने बताया कि रॉकेट को जांच, मरम्मत और विस्तृत तकनीकी समीक्षा के लिए व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में वापस ले जाया जा रहा है।
तकनीकी दिक्कत
इस बार क्या आई तकनीकी दिक्कत?
नासा के अनुसार, स्पेस लॉन्च सिस्टम के अंतरिम क्रायोजेनिक प्रोपल्शन स्टेज में हीलियम फ्लो अचानक रुक गया। हीलियम इंजन को साफ करने, सिस्टम को सुरक्षित रखने और फ्यूल टैंक में जरूरी दबाव बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, हाल ही में हुए दोनों ड्रेस रिहर्सल टेस्ट सफल रहे थे, लेकिन इस नए फेलियर के बाद मार्च में लॉन्च संभव नहीं रहा। इंजीनियर अब फिल्टर, वाल्व, पाइपलाइन और कनेक्टर प्लेट की बारीकी से जांच कर रहे हैं।
चुनौतियां
पहले भी सामने आ चुकी हैं चुनौतियां
इस मिशन को पहले भी कई बार टाला जा चुका है और हर बार अलग तकनीकी कारण सामने आए हैं। फरवरी की शुरुआत में हुए वेट ड्रेस रिहर्सल के दौरान ईंधन भरते समय हल्का हाइड्रोजन लीक मिला था। हाइड्रोजन एक अत्यंत ज्वलनशील गैस है, इसलिए इसे गंभीर जोखिम माना गया। बाद में दूसरी रिहर्सल सफल रही और बिना किसी रिसाव के परीक्षण पूरा हुआ। इसके बावजूद नई हीलियम समस्या ने मिशन की टाइमलाइन को फिर पीछे धकेल दिया।
ट्विटर पोस्ट
यहां देखें पोस्ट
As soon as Tuesday, Feb. 24, we will roll our Moon rocket for our Artemis II mission off the launch pad, weather pending. Engineers are continuing to prepare for the move after encountering an issue with the flow of helium to the rocket’s upper stage. Details:… pic.twitter.com/DPX6vjg0q5
— NASA (@NASA) February 22, 2026
मिशन
क्या है आर्टेमिस 2 मिशन का उद्देश्य?
आर्टेमिस 2 नासा का इंसानों के साथ चंद्रमा के पास जाने वाला अहम मिशन है। इसमें चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में सवार होकर चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे और लगभग दस दिन बाद सुरक्षित पृथ्वी पर लौटेंगे। इस उड़ान में चंद्रमा पर लैंडिंग नहीं होगी, लेकिन यह आगे के मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण अभ्यास है। इसकी सफलता से नासा की तकनीकी क्षमता साबित होगी और भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी बेस बनाने की दिशा में मजबूत कदम माना जाएगा।