मेटा के किशोरों की सुरक्षा के लिए किए बदलाव भारत में नहीं कारगर
मेटा ने अमेरिकी अदालत से मंजूर एक समझौते के तहत फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए नए सुरक्षा कदम उठाए हैं।
इनमें स्क्रीन टाइम की सीमा तय करना, देर रात ऐप्स को ब्लॉक करना, स्कूल के समय नोटिफिकेशन को म्यूट करना और उम्र की कड़ी जांच करना शामिल है।
इन उपायों का लक्ष्य किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को बचाना और सोशल मीडिया की लत को कम करना है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि ये बदलाव भारत के डिजिटल माहौल या यहां के मौजूदा कानूनों के हिसाब से शायद उतने कारगर न हों।
स्थानीय जरूरतों के हिसाब से हो बदलाव
भारत का डाटा प्राइवेसी कानून बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति और उन तक पहुंचने वाले लक्षित विज्ञापनों पर रोक लगाने पर ज्यादा ध्यान देता है।
हालांकि, यह कानून स्क्रीन टाइम की समस्या या इसकी लत से निपटने पर उतना जोर नहीं देता। किशोरों में एक ही डिवाइस के इस्तेमाल और ऑनलाइन बाल सुरक्षा जैसे गंभीर मसलों को देखते हुए विशेषज्ञ भारत के लिए ऐसे 'वेलबीइंग बाई डिजाइन' फ्रेमवर्क की मांग कर रहे हैं, जो सबूतों पर आधारित हो और यहां की जरूरतों के हिसाब से असल में काम करे।
उनका मानना है कि केवल मेटा ने अमेरिका में जो किया, उसकी नकल करने से काम नहीं चलेगा।