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महाराष्ट्र में 10 में से 3 बच्चे गेमिंग की लत के शिकार, सरकार की बढ़ी चिंता
महाराष्ट्र में बच्चे गेमिंग की लत के शिकार

महाराष्ट्र में 10 में से 3 बच्चे गेमिंग की लत के शिकार, सरकार की बढ़ी चिंता

Feb 26, 2026
05:17 pm

क्या है खबर?

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में बच्चों के बीच बढ़ती डिजिटल लत की चिंता को देखते हुए विशेषज्ञों की टीम का गठन किया है। यह टीम नाबालिगों में बढ़ते स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गेमिंग के प्रभाव का अध्ययन करेगी। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री आशीष शेलार ने विधान परिषद में इसकी जानकारी दी है। पैनल को डिजिटल एक्सपोजर के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक असर पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है।

चिंता

क्यों बढ़ी सरकार की चिंता?

बजट सत्र 2026 के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार, राज्य के पांच पहचाने गए केंद्रों पर दर्ज हर 10 में से लगभग 3 मामले गेमिंग लत से जुड़े थे। एक स्कूल सर्वे में भी पाया गया कि करीब 40 प्रतिशत बच्चे मध्यम से गंभीर गेमिंग एडिक्शन की श्रेणी में आते हैं। इन आंकड़ों ने सरकार और विधायकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या तेजी से फैल रही है।

पैनल

पैनल में कौन-कौन होंगे शामिल?

महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, इस पैनल में शिक्षाविद, बाल मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक, बाल रोग विशेषज्ञ, तकनीकी विशेषज्ञ और कानूनी जानकार शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अभिभावक समूहों के प्रतिनिधियों को भी जोड़ा गया है। अधिकारियों ने बताया कि अधिक स्क्रीन उपयोग से नींद की कमी, चिंता, चिड़चिड़ापन और पढ़ाई में गिरावट जैसे मामले सामने आ रहे हैं। यह समस्या शहरी और छोटे शहरों दोनों में देखी जा रही है।

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योजना

संभावित कदम और आगे की योजना

पैनल ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के लिए सख्त आयु सत्यापन, e-KYC व्यवस्था और समय सीमा तय करने जैसे उपायों पर सुझाव देगा। इसके अलावा, डिजिटल हाइजीन और साइबर वेलनेस को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने पर भी विचार हो रहा है। शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और अभिभावकों के लिए जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना है। महाराष्ट्र सरकार इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी उभरती एक बड़ी चुनौती मान रही है।

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