वैज्ञानिकों ने खोजी न्यूरॉन्स के मरने की वजह, बदल सकता है इलाज का तरीका
किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर और फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया जैसी बीमारियों में दिमाग की कोशिकाओं के मरने का एक नया राज सुलझाया है।
उनकी टीम ने 'कैरियोप्सिस' नाम की एक खास प्रक्रिया का पता लगाया है। इसमें जहरीले प्रोटीन जमा होकर कोशिका के सबसे जरूरी हिस्से न्यूक्लियस (केंद्रक) को ही कमजोर कर देते हैं और उसे टूटने पर मजबूर कर देते हैं।
यही वजह है कि इन बीमारियों में इतने सारे न्यूरॉन्स खत्म हो जाते हैं। यह नई खोज भविष्य में इन बीमारियों के बेहतर इलाज खोजने की दिशा में एक अहम कदम हो सकती है।
काइनेज एंजाइम रोकने से कम हुआ नुकसान
वैज्ञानिकों ने पाया कि डिमेंशिया के मरीजों में लगभग 35 फीसदी न्यूरॉन्स में यह कैरियोप्सिस की प्रक्रिया दिख रही थी, जबकि स्वस्थ दिमाग के न्यूरॉन्स में यह सिर्फ 15 फीसदी थी।
यह आकड़ा दर्शाता है कि यह प्रक्रिया बीमारी में कितनी अहम भूमिका निभाती है। इस पूरी प्रक्रिया में p38 MAP काइनेज नाम के एक एंजाइम की मुख्य भूमिका होती है। जब जहरीले प्रोटीन इस एंजाइम को एक्टिवेट कर देते हैं, तो यह न्यूक्लियस के एक बेहद जरूरी हिस्से लैमिन B1 को खत्म कर देता है। इसी वजह से कोशिकाएं धीरे-धीरे मर जाती हैं।
वैज्ञानिकों ने जब इस एंजाइम को रोकने की कोशिश की तो कोशिकाओं को होने वाले नुकसान की रफ्तार काफी कम हो गई।
इससे एक नई उम्मीद जगी है कि अगर, हम कारियोप्सिस को रोक पाएं तो अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से लड़ने के नए और प्रभावी तरीके ढूंढना संभव हो सकता है।