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देश में 17 जुलाई से शुरू होगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानिए मार्ग-किराया और अन्य जरूरी बातें
देश में 17 जुलाई से शुरू होगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन

देश में 17 जुलाई से शुरू होगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानिए मार्ग-किराया और अन्य जरूरी बातें

Jul 07, 2026
11:32 am

क्या है खबर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को भारत की पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे, जो स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में देश का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ट्रेन हरियाणा के जिंद और सोनीपत के बीच चलेगी। इस ट्रेन का संचालन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से होगा, जिससे लगभग शून्य प्रदूषण होता है। आइए इस ट्रेन के किराए, खासियत और अन्य सभी महत्वपूर्ण जानकारियों पर नजर डालते हैं।

पहल

भारत की हरित परिवहन मिशन पहल का हिस्सा है यह ट्रेन

इस ट्रेन की शुरुआत को भारत के हरित परिवहन मिशन के साथ-साथ मेक इन इंडिया पहल के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल और स्वदेशी रेल प्रौद्योगिकी विकसित करने के देश के प्रयासों को प्रदर्शित करती है। बड़ी बात यह है कि इस ट्रेन के संचालन से जहां शून्य प्रदूषण होगा, वहीं इससे यात्रा करना भी काफी किफायती होने वाला है। इससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

किराया

कितना होगा इस ट्रेन में यात्रा करने का किराया?

भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन ट्रेन का किराया बेहद किफायती रखा है। टिकट की कीमतें 5 रुपये से 25 रुपये तक हैं। उम्मीद है कि यह ट्रेन लगभग 90 किलोमीटर लंबे जिंद-सोनीपत मार्ग को एक घंटे में तय कर लेगी, जिससे मौजूदा डीजल मल्टीपल यूनिट (DMU) सेवा की तुलना में समय काफी कम हो जाएगा। DMU में इसी यात्रा में लगभग 2 घंटे लगते हैं। ट्रेन की यात्री क्षमता लगभग 2,500 होगी, जिससे इस मार्ग के यात्रियों को राहत मिलेगी।

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तकनीक

हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित होगी यह ट्रेन

इस ट्रेन में 1,200 किलोवाट का हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम लगाया जाएगा। डीजल के बजाय, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में केवल भाप और ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। हाइड्रोजन से भर जाने के बाद ट्रेन लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तय कर सकेगी। इस ट्रेन में 90 किलोमीटर की यात्रा के लिए लगभग 27 हाइड्रोजन सिलेंडर लगाए गए हैं।

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सुरक्षा

रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा पर दिया विशेष ध्यान

रेलवे ने इस ट्रेन में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान रखा है। इसके लिए ट्रेन में हाइड्रोजन रिसाव डिटेक्टर, अग्नि डिटेक्टर और आधुनिक नियंत्रण प्रणाली भी स्थापित की गई हैं, जिनकी नियमित रूप से जांच की जाएगी। इस ट्रेन को लखनऊ स्थित अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) द्वारा डिजाइन किया गया था और चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में इसका निर्माण किया गया है। यह देश के परिवहन में नया अध्याय जोड़ेगी।

लागत

ट्रेन के निर्माण में कितनी आई है लागत?

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन के निर्माण के करीब 89 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह भारतीय रेलवे के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि और स्वच्छ परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल साबित होता है, तो भविष्य में इसी तरह की हाइड्रोजन ट्रेनों को अन्य मार्गों पर भी शुरू किया जा सकता है, जिससे डीजल पर निर्भरता कम करने, ईंधन लागत घटाने और पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिल सकेगी।

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