ISRO दिसंबर तक लॉन्च करेगा पहला मानवरहित गगनयान मिशन, अंतिम चरण में तैयारी
क्या है खबर?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) मौजूदा वित्त वर्ष में 8 लॉन्च व्हीकल मिशन और 12 सैटेलाइट मिशन की योजना बना रहा है। इस शेड्यूल में सबसे अहम पड़ावों में से एक गगनयान का पहला बिना क्रू वाला मिशन है। यह योजना ऐसे समय में आई, जब ISRO अपनी लॉन्च क्षमता को मजबूत करने और मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की तैयारी में जुटा है। अंतरिक्ष एजेंसी के लिए यह ऐसा साल बीता है, जिसमें कोई सफल लॉन्च नहीं हो पाया।
3 मिशन
3 बिना क्रू वाले मिशन होंगे लॉन्च
ISRO के चेयरमैन वी नारायणन ने कहा कि अगले 4 महीनों में पहला बिना क्रू वाला गगनयान मिशन लॉन्च होने की उम्मीद है।
अहमदाबाद में तीसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि गगनयान के लिए लगभग 8,000 परीक्षण पूरे हो चुके हैं।
एजेंसी प्रमुख ने कहा, "हम आखिरी चरण में हैं।" इसके साथ ही बताया कि क्रू वाले मिशन से पहले 3 बिना क्रू वाले मिशन लॉन्च किए जाएंगे।
फायदा
बिना क्रू वाले मिशन से होगा यह फायदा
बिना क्रू वाला मिशन अंतरिक्ष यात्रियों के बिना मानव अंतरिक्ष उड़ान का अभ्यास करेगा। इसका मकसद यह देखना है कि इंसानी जान को जोखिम में डाले बिना रॉकेट और अंतरिक्ष यान कैसा काम करते हैं?
गगनयान भारत के सबसे जटिल तकनीकी कार्यक्रमों में से एक है, जिसके लिए मानव-अनुकूल लॉन्च व्हीकल, क्रू मॉड्यूल, जीवन-रक्षक प्रणालियों और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी की जरूरत है।
इसको अंतरिक्ष में भारत की स्थायी मौजूदगी की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अंतरिक्ष कार्यक्रम
भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में मिलेगी मदद
नारायणन ने कहा कि ISRO की योजना चालू वित्त वर्ष में 12 सैटेलाइट तैयार करने और 8 लॉन्च व्हीकल मिशन पूरे करने की है।
इन मिशनों से कम्युनिकेशन, नेविगेशन, पृथ्वी की निगरानी और वैज्ञानिक रिसर्च, इंसानों के अंतरिक्ष मिशन की तैयारी में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, रॉकेट के लगातार 2 बार फेल होने के बाद सरकार ने पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) की उड़ानों पर रोक लगा दी है और कई जमीनी टेस्ट होने बाकी हैं।
निजी भागीदारी
निजी भागीदारी पर दिया जोर
नारायणन ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष संबंधी जरूरतें तेजी से बढ़ी हैं।
उन्होंने बताया कि अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के 64 साल बाद देश के पास अभी 56 अंतरिक्ष एसेट्स (उपकरण/सैटेलाइट) हैं, लेकिन अगले 5 सालों में उसे कम से कम 200 से 300 सैटेलाइट की जरूरत होगी।
ISRO प्रमुख ने कहा कि यह लक्ष्य सिर्फ सरकारी क्षेत्र से हासिल नहीं किया जा सकता और इसके लिए निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की ज्यादा भागीदारी की जरूरत होगी।