ISRO में कर्मचारियों की कमी के कारण बड़े मिशनों पर मंडराया खतरा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) दशकों में अपने सबसे बड़े कर्मचारियों की कमी का सामना कर रहा है।
संगठन के पास कुल मंजूर पदों में से सिर्फ 72.2 फीसदी कर्मचारी ही मौजूद हैं, यानि लगभग 30 फीसदी पद खाली पड़े हैं।
करीब 20,000 स्वीकृत पदों में से 5,600 से ज्यादा पद अभी भरे नहीं गए हैं। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है, जब ISRO अपने कुछ सबसे महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण मिशनों पर काम करने की तैयारी में है।
इस साल के अंत तक 2,300 पदों को भरने की तैयारी
वित्तीय वर्ष 2019-20 से ही कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है। इसकी एक वजह यह भी रही कि कोविड-19 महामारी के कारण लगभग 3 साल तक नई भर्तियां रुकी रहीं और भर्ती के नियम भी काफी सख्त थे। अब भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने 2026 के अंत तक 2,300 से अधिक पदों को भरने की तेज कोशिश शुरू कर दी है।
यह समय ISRO के लिए काफी संवेदनशील है क्योंकि वह मानव अंतरिक्ष उड़ान चंद्र मिशन और एक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
इन महत्वपूर्ण चुनौतियों के लिए हर विशेषज्ञता और अनुभव की आवश्यकता है, इसलिए अनुभवी वैज्ञानिकों को मिशन के बीच में छोड़कर जाने से रोकने के लिए अब कड़े निकास नियम लागू किए गए हैं।