डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में AI जोड़ने से शासन व्यवस्था को मिलेगा नया रूप- जियो ग्रुप CTO
क्या है खबर?
भारत की शासन व्यवस्था में अगला बड़ा बदलाव नए ऐप्स से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सार्वजनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में शामिल करने से आएगा। रिलायंस जियो के ग्रुप मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) श्याम मार्डीकर ने तर्क दिया कि कनेक्टिविटी और कंप्यूटिंग का एक जगह आना लोगों, उद्यमों और सरकारों पर कई गुना प्रभाव डालेगा। उन्होंने कहा, "अगर, हम अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के ऊपर AI को लागू करते हैं तो शासन अधिक उत्तरदायी, कुशल और नागरिक-केंद्रित बन सकता है।"
कारण
कनेक्टिविटी और कंप्यूटिंग बन रहे इंटेलिजेंस
उनके अनुसार, शासन में बदलाव 2 तीव्र गति से बढ़ती ताकतों- कनेक्टिविटी और कंप्यूटिंग के कारण हो रहा है। दोनों के बीच साझा माध्यम डाटा है। कनेक्टिविटी डाटा का परिवहन करती है, जबकि कंप्यूटिंग उसे संसाधित और व्याख्या करती है। जैसे-जैसे ये दोनों एक साथ आते हैं, नेटवर्क निष्क्रिय पाइपलाइन के बजाय इंटेलिजेंस सिस्टम बनते जा रहे हैं, जो रियल टाइम में संवेदन, अनुकूलन, पूर्वानुमान और कार्रवाई करने में सक्षम हैं।
फायदा
AI जुड़ने से शासन की दक्षता में होगा सुधार
उन्होंने तर्क दिया कि कनेक्टिविटी और कंप्यूटिंग के एक जगह आना AI को टूल्स, वाहनों, उद्यमों और सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के भीतर धकेल रहा है। इससे लोगों और उद्योगों को ऑटोमैटेड सेवाएं मिल रही हैं। मार्दिकर के सुझाव के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन शासन व्यवस्था में हो सकता है। AI लागू करने से सार्वजनिक सिस्टम्स प्रतिक्रियात्मक होने के बजाय पूर्वानुमानित हो सकती हैं, सेवा वितरण दक्षता में सुधार हो सकता है और दूरदराज में रहने वालों तक पहुंच बढ़ सकती है।