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भारतीय एजेंसियों और चुनिंदा निजी कंपनियों को मिथोस तक मिली पहुंच
क्लाउड मिथोस सॉफ्टवेयर की खामियों का पता लगाता है

भारतीय एजेंसियों और चुनिंदा निजी कंपनियों को मिथोस तक मिली पहुंच

Jun 07, 2026
04:00 pm

क्या है खबर?

भारतीय सरकारी एजेंसियों और चुनिंदा निजी क्षेत्र की कंपनियों को एंथ्रोपिक के एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल क्लाउड मिथोस प्रीव्यू तक पहुंच प्रदान की गई है। यह कदम प्रोजेक्ट ग्लास विंग के वैश्विक विस्तार का हिस्सा है। सूत्रों ने PTI को बताया कि अभी तक केवल कुछ ही भारतीय संस्थाओं को यह सुविधा मिली है। यह मॉडल सॉफ्टवेयर कमजोरियों की पहचान करने और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है।

प्रोजेक्ट ग्लास विंग

क्या है प्रोजेक्ट ग्लास विंग?

प्रोजेक्ट ग्लास विंग को एंथ्रोपिक ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर को सुरक्षित करने का एक सहयोगात्मक प्रयास बताता है, जिसका उद्देश्य चुनिंदा संगठनों को मिथोस तक पहुंच प्रदान करके साइबर सुरक्षा में सुधार करना है। यह सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का पता उनके दुरुपयोग से पहले ही लगा सकता है। अप्रैल में घोषणा किए जाने के बाद लगभग 50 भागीदार संगठनों को इसकी पहुंच दी गई थी। उन्होंने इससे विभिन्न कोडबेस में 10,000 से अधिक खामियों की पहचान की।

विस्तार 

150 और संगठनों तक किया मिथोस का विस्तार  

इस सप्ताह की शुरुआत में एंथ्रोपिक ने प्रोजेक्ट ग्लास विंग के व्यापक विस्तार की घोषणा की, जिसमें 15 से अधिक देशों के लगभग 150 और संगठन शामिल किए गए। नए समूह में बिजली, जल, स्वास्थ्य सेवा, संचार और हार्डवेयर जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के संचालक शामिल हैं। इनमें से कई नए भागीदार ऐसे विक्रेता हैं, जो उन कोडबेस का रखरखाव करते हैं, जिन पर दुनियाभर के कई अन्य संगठन और सरकारें निर्भर करते हैं।

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