भारत AI की सुरक्षा के लिए नहीं करें अमेरिकी मॉडल की नकल, विशेषज्ञों ने दिया सुझाव
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अमेरिकी टेक दिग्गजों के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सुरक्षा समझौते की केवल नकल नहीं करनी चाहिए।
दरअसल, यह समझौता कंपनियों को अपनी सुरक्षा की निगरानी खुद करने की छूट देता है। इसके बजाय, विशेषज्ञ एक ऐसा घरेलू तरीका अपनाने पर जोर दे रहे हैं, जो भारत की खास जरूरतों को पूरा करे। इसमें साइबर हमलों और डीपफेक जैसी समस्याओं से निपटना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि हर किसी की बात सुनी जाए।
हाइब्रिड AI नियमों की मांग की
नैसकॉम की कार्यकारी परिषद के सदस्य श्रीकांत वेलामाकन्नी जैसे प्रमुख लोगों का कहना है कि भारत के AI नियमों में सख्ती और लचीलापन दोनों का मेल होना चाहिए। इसमें अनिवार्य जांच के साथ-साथ अपनी मर्जी से माने जाने वाले दिशा-निर्देश भी हों। स्वतंत्र ऑडिट, साफ जवाबदेही, स्थानीय भाषाओं और संस्कृतियों के लिए समर्थन जैसे सुझाव भी दिए गए हैं। सरकार नए कानून बनाने पर भी विचार कर रही है, जिससे AI सुरक्षित रहे और इसके विकास में कोई रुकावट भी न आए।