भारत 50 नए जासूसी सैटेलाइट लॉन्च करने की कर रहा तैयारी, क्या होगी खासियत?
क्या है खबर?
केंद्र सरकार जल्द ही बड़ी संख्या में जासूसी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में तैनात करने की योजना बना रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत 50 से अधिक नए मिलिट्री सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है, जिनमें रात और खराब मौसम में भी साफ तस्वीर लेने की क्षमता होगी। हाल की सैन्य घटनाओं में सामने आई निगरानी की कमियों के बाद यह फैसला लिया गया है। इसका मकसद सीमाओं और संवेदनशील इलाकों पर लगातार और भरोसेमंद नजर बनाए रखना है।
जरूरत
क्यों पड़ी जरूरत?
पिछले साल मई में पाकिस्तान के साथ हुए चार दिन के सैन्य तनाव के दौरान भारत की सैटेलाइट क्षमताओं की सीमाएं साफ दिखीं। दिन में निगरानी ठीक रही, लेकिन रात और घने बादलों में टारगेट पहचानना मुश्किल हो गया। कई बार सर्विलांस में दिनों का गैप आया। इस कारण भारत को विदेशी निजी कंपनियों से सैटेलाइट तस्वीरें खरीदनी पड़ीं। इस बाहरी निर्भरता से ऑपरेशन की प्लानिंग पर असर पड़ा, जिसके बाद सिस्टम अपग्रेड करने की जरूरत महसूस हुई।
फायदा
नई योजना से क्या फायदा होगा?
नई योजना के तहत भारत आधुनिक रडार आधारित सैटेलाइट तकनीक अपनाएगा, जिससे रात और हर मौसम में निगरानी संभव होगी। इससे सीमाओं पर होने वाली गतिविधियों की समय पर जानकारी मिल सकेगी। टारगेट पहचान ज्यादा सटीक होगी और सर्विलांस में आने वाले खाली हिस्से कम होंगे। तेज डाटा मिलने से सेना और सुरक्षा एजेंसियां जल्दी फैसले ले सकेंगी। कुल मिलाकर, यह कदम देश की सुरक्षा व्यवस्था को ज्यादा मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।
खर्च
आगे की तैयारी और खर्च
सरकार पहले चरण में 50 से अधिक सैटेलाइट लॉन्च करेगी और अगले कुछ वर्षों में यह संख्या 100 से 150 तक पहुंच सकती है। इस पूरे कार्यक्रम पर करीब 26,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें ISRO के साथ निजी भारतीय कंपनियां भी शामिल होंगी। इसके अलावा, भारत "बॉडीगार्ड सैटेलाइट" और विदेशों में ग्राउंड स्टेशन बनाने पर भी विचार कर रहा है, जिससे स्पेस सिक्योरिटी और निगरानी क्षमता और बेहतर हो सके।