CO2 का बढ़ना गेहूं के ग्लूटेन पर डालता है बुरा असर, नए अध्ययन में दी चेतावनी
एक नए अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है कि हवा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का स्तर बढने से गेहूं में प्रोटीन की मात्रा पर बुरा असर पड सकता है।
इसका मतलब है कि गेहूं में ग्लूटेन की कमी आ सकती है और कुछ खास एंजाइम इनहिबिटर की मात्रा बढ सकती है। इस बदलाव से ब्रेड और बाकी बेकरी उत्पाद पहले जैसे नहीं बन पाएंगे। साथ ही यह भी हो सकता है कि गेहूं हमारे शरीर के लिए पहले जैसा सेहतमंद न रहे।
नई किस्में तैयार करने की सिफारिश
शोधकर्ताओं ने 10 तरह के विंटर गेहूं पर अलग-अलग CO2 वाली परिस्थितियों में परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि जैसे-जैसे CO2 का स्तर बढता है गेहूं अपनी बेकिंग गुणवत्ता खो सकता है।
इसके अलावा, उन लोगों के लिए भी इसमें बदलाव आ सकते हैं, जिन्हें ग्लूटेन से जुडी समस्याएं हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें अभी से गेहूं की नई किस्में तैयार करना शुरू कर देना चाहिए, ताकि जलवायु परिवर्तन के बावजूद हमारी रोटी स्वादिष्ट और पौष्टिक बनी रहे।