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नासा का नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप कैसे होगा हबल से अधिक शक्तिशाली?
नासा नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप को लॉन्च करने की तैयारी में है

नासा का नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप कैसे होगा हबल से अधिक शक्तिशाली?

Apr 22, 2026
05:42 pm

क्या है खबर?

अंतरिक्ष एजेंसी नासा इस साल अपने नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप को लॉन्च करने की तैयारी में है। इसकी फाइनल असेंबली मैरीलैंड के गोडार्ड स्पेस सेंटर में पूरी हो चुकी है। अब यह टेलीस्कोप टेस्टिंग और लॉन्च की अंतिम तैयारी में है। इसे हबल और जेम्स वेब के बाद अगला बड़ा मिशन माना जा रहा है। यह अंतरिक्ष को पहले से ज्यादा बड़े स्तर पर समझने और नई खोजों के लिए अहम भूमिका निभाएगा, जिससे नई जानकारी मिल सकेगी।

व्यू

हबल से 100 गुना बड़ा व्यू

रोमन टेलीस्कोप का मिरर करीब 2.4 मीटर का है। यह हबल स्पेस टेलीस्कोप जितना ही है, लेकिन असली फर्क इसकी देखने की क्षमता में है। यह एक बार में हबल से लगभग 100 गुना ज्यादा आसमान को कैप्चर कर सकता है। इसका मतलब है कि जहां हबल को कई तस्वीरें लेनी पड़ती थीं, वहां रोमन एक ही बार में बड़ा हिस्सा देख सकेगा और काम तेजी से पूरा करेगा, जिससे समय और संसाधनों की बचत भी होगी।

क्षमता

हबल से 1,000 गुना तेज डाटा जुटाने की क्षमता

नासा के मुताबिक, रोमन टेलीस्कोप सर्वे के दौरान हबल के मुकाबले करीब 1000 गुना तेजी से डाटा इकट्ठा कर सकता है। इससे वैज्ञानिकों को कम समय में ज्यादा जानकारी मिलेगी। बड़े पैमाने पर डाटा मिलने से गैलेक्सी, तारों और अंतरिक्ष की संरचना को समझना आसान होगा। यह क्षमता इसे पुराने टेलीस्कोप के मुकाबले कहीं ज्यादा असरदार और उपयोगी बनाती है, जिससे रिसर्च की गति भी पहले के मुकाबले काफी तेज हो जाएगी।

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स्कैन

बार-बार स्कैन से नई खोजें होंगी आसान

यह टेलीस्कोप एक ही क्षेत्र को बार-बार स्कैन करेगा, जिससे अचानक होने वाली घटनाओं को पकड़ना पहले की तुलना में बहुत आसान होगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे हजारों सुपरनोवा जैसी घटनाओं की पहचान हो सकेगी। इससे अंतरिक्ष में हो रहे बदलावों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा और रिसर्च में तेजी आएगी, जो पहले इतनी आसान नहीं थी, और इससे नई खोजों के मौके भी लगातार बढ़ते रहेंगे।

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अन्य

छिपे ग्रह खोजने और भविष्य की तैयारी

रोमन में कोरोनाग्राफ नाम का खास उपकरण है, जो तारों की तेज रोशनी को रोककर पास के ग्रहों को देखने में मदद करेगा। इससे दूर और धुंधले एक्सोप्लैनेट की पहचान संभव होगी। लॉन्च के बाद इसे पृथ्वी से करीब 10 लाख मील दूर L2 पॉइंट पर भेजा जाएगा। इससे पहले इसकी कई तरह की टेस्टिंग होगी, ताकि यह लंबे समय तक सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से काम कर सके और भविष्य के मिशनों के लिए नई तकनीक मजबूत बना सके।

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