कैसे किया जा रहा कैश ऑन डिलीवरी स्कैम? जानिए इससे कैसे बचें
क्या है खबर?
धोखेबाज कैश ऑन डिलीवरी (COD) स्कैम के जरिए लोगों और छोटे व्यवसायों को तेजी से निशाना बना रहे हैं। इसमें बिना मांगे पार्सल भेजकर पैसे वसूल लिए जाते हैं। पीड़ित यह मानकर भुगतान कर देते हैं कि पार्सल परिवार के किसी सदस्य या सहकर्मी ने मंगवाया होगा और बाद में पता चलता है कि बॉक्स में पत्थर, कागज या कम कीमत की बेकार चीजें हैं। आइए जानते हैं कैश ऑन डिलीवरी स्कैम को कैसे अंजाम दिया जा रहा है।
शुरुआत
ऐसे होती है स्कैम की शुरुआत
इस ठगी की शुरुआत धोखेबाजों द्वारा नाम, फोन नंबर और पते जैसी व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करने से होती है। यह जानकारी अक्सर डाटा लीक, सार्वजनिक लिस्टिंग या हैक किए गए ऑनलाइन विक्रेता अकाउंट्स से मिलती है। इस डाटा का उपयोग करके जालसाज लॉजिस्टिक्स कंपनियों के माध्यम से पार्सल भेजते हैं और डिलीवरी पर नकद पैसा मांगते हैं। जब कूरियर आता है तो प्राप्तकर्ता से बताई गई राशि का भुगतान करने के लिए कहा जाता है।
भुगतान विधि
काफी प्रचलित है यह भुगतान विधि
कैश ऑन डिलीवरी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर एक मानी हुई भुगतान विधि है। इस कारण कई लोग ऑर्डर की पुष्टि किए बिना बहकावे में आ जाते हैं। पार्सल देखे बिना फटाफट भुगतान कर देते हैं। बाद में इसे खोलने पर कागज, पत्थर या ईंट निकल सकती है। COD में चार्जबैक, प्रमाणीकरण और धोखाधड़ी निगरानी जैसी सुरक्षा प्रणालियों का उपयोग नहीं किया जाता है। लेन-देन घर पर होता है, जिससे एक बार भुगतान होने के बाद इसे रद्द करना मुश्किल होता है।
बचाव
ठगी से ऐसे बचें
सभी ऑनलाइन ऑर्डर्स पर नजर रखना सुरक्षा की पहली पंक्ति है। परिवार के सदस्यों या कार्यालय के कर्मचारियों से डिलीवरी की पुष्टि करने से अनजाने में होने वाले भुगतान से बचा जा सकता है। उपभोक्ता किसी भी अपरिचित पैकेज को अस्वीकार कर सकते हैं। कूरियर सर्विसेज को डिलीवरी को अस्वीकृत करना और उसे भेजने वाले को वापस करना अनिवार्य है। वसूली में सहयोग के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं।