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कैसे बना शनि का सबसे बड़ा चंद्रमा टाइटन? वैज्ञानिकों ने बताई नई संभावित वजह
टाइटन को लेकर नई थ्योरी सामने आई

कैसे बना शनि का सबसे बड़ा चंद्रमा टाइटन? वैज्ञानिकों ने बताई नई संभावित वजह

Feb 24, 2026
03:59 pm

क्या है खबर?

शनि का सबसे बड़ा चंद्रमा टाइटन वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य है। अब नई रिसर्च में इसकी उत्पत्ति और शुरुआती इतिहास को लेकर अहम और दिलचस्प जानकारी सामने आई है। अध्ययन के अनुसार, करीब 50 करोड़ साल पहले टाइटन की टक्कर एक दूसरे बड़े चांद से हुई थी। यह टक्कर इतनी शक्तिशाली और विनाशकारी थी कि वह चांद पूरी तरह टाइटन में समा गया। इसी घटना से शनि के झुकाव और उसके प्रसिद्ध छल्लों की शुरुआत जुड़ी हो सकती है।

संकेत

कैसिनी मिशन के डाटा से मिला संकेत

2004-2017 तक शनि की परिक्रमा करने वाले कैसिनी मिशन के विस्तृत डाटा ने कई नए और जटिल सवाल खड़े किए थे। वैज्ञानिकों ने पाया कि टाइटन हर साल करीब 11 सेंटीमीटर की दर से शनि से दूर जा रहा है, जो पहले के अनुमान से कहीं अधिक मानी जा रही है। कंप्यूटर सिमुलेशन, गणनाओं और पुराने अंतरिक्ष डाटा को मिलाकर शोधकर्ताओं ने माना कि किसी अतिरिक्त खोए हुए चांद की मौजूदगी ने पूरे सिस्टम को गहराई से प्रभावित किया होगा।

रहस्य

शनि के छल्लों का रहस्य भी जुड़ा

नई थ्योरी के अनुसार, टाइटन और खोए हुए चांद की टक्कर से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानी टुकड़े अंतरिक्ष में फैल गए, जिन्होंने छल्लों को जन्म दिया। यह भी माना जा रहा है कि हाइपरियन नाम का अनोखा और असमान आकार वाला चांद उसी घटना का परिणाम हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि शनि का 26.7 डिग्री झुकाव, उसकी घूमने की गति और कक्षा में बदलाव भी इसी बड़ी और ऐतिहासिक टक्कर से जुड़ा हो सकता है।

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जांच

ड्रैगनफ्लाई मिशन करेगा जांच

इस नई थ्योरी की पुष्टि और गहराई से जांच के लिए नासा का ड्रैगनफ्लाई मिशन बेहद अहम माना जा रहा है। यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला, कार के आकार का रोटरक्राफ्ट 2028 में लॉन्च किया जाएगा और 2034 तक टाइटन की सतह पर पहुंचेगा। वहां यह अलग-अलग स्थानों से सतह के नमूने लेकर उनका वैज्ञानिक विश्लेषण करेगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस मिशन से टाइटन की उम्र, संरचना और शनि के छल्लों को समझने में बड़ी मदद मिलेगी।

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