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अंतरिक्ष में रिफ्लेक्टिव सैटेलाइट पर्यावरण के लिए कैसे साबित हो सकता है खतरनाक?
ये सैटेलाइट रात में रोशनी बढ़ाने के लिए बनाए जा रहे हैं

अंतरिक्ष में रिफ्लेक्टिव सैटेलाइट पर्यावरण के लिए कैसे साबित हो सकता है खतरनाक?

Apr 06, 2026
07:29 pm

क्या है खबर?

दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अंतरिक्ष में रिफ्लेक्टिव सैटेलाइट और मिरर लगाने के नए प्रस्ताव पृथ्वी के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। ये सैटेलाइट रात में रोशनी बढ़ाने के लिए बनाए जा रहे हैं, लेकिन इससे प्राकृतिक अंधेरा खत्म हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव इंसानों, जानवरों और पूरे पर्यावरण पर गंभीर असर डाल सकता है और इसे लागू करने से पहले गहराई से जांच जरूरी है।

असर

नींद और शरीर की घड़ी पर असर

वैज्ञानिकों के अनुसार, रात में कृत्रिम रोशनी बढ़ने से इंसानों की बॉडी क्लॉक यानी सर्कडियन रिदम बिगड़ सकती है। इससे नींद की समस्या, हार्मोन में बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। यह रोशनी सिर्फ इंसानों को ही नहीं, बल्कि जानवरों और पक्षियों के व्यवहार को भी बदल सकती है। कई जीव रात के अंधेरे पर निर्भर होते हैं, इसलिए यह बदलाव उनके जीवन चक्र को भी प्रभावित कर सकता है।

खतरा

प्रकृति और इकोसिस्टम को खतरा

रात की रोशनी बढ़ने से पौधों की ग्रोथ, जानवरों की गतिविधियां और समुद्री जीवन भी प्रभावित हो सकता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि फाइटोप्लांकटन जैसे छोटे जीव, जो समुद्री फूड चेन का आधार हैं, उनकी प्राकृतिक प्रक्रिया भी बदल सकती है। इससे पूरे इकोसिस्टम पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, पक्षियों और कीड़ों की दिशा पहचानने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है, जिससे उनकी संख्या पर असर पड़ सकता है।

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खगोल विज्ञान

आसमान की चमक और खगोल विज्ञान पर असर

सैटेलाइट्स की बढ़ती संख्या से रात का आसमान पहले से ज्यादा चमकीला हो रहा है। इससे तारों को देखना मुश्किल हो सकता है और खगोल विज्ञान की रिसर्च पर असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सैटेलाइट्स की रोशनी टेलीस्कोप की तस्वीरों को भी खराब कर सकती है। आने वाले समय में अगर सैटेलाइट्स और बढ़े, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है और प्राकृतिक रात का अनुभव खत्म हो सकता है।

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चेतावनी

वैज्ञानिकों की अपील और चेतावनी

दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने सरकारों और एजेंसियों से अपील की है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने से पहले पूरी जांच की जाए। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि पूरी पृथ्वी के पर्यावरण को प्रभावित करने वाला कदम है। अगर इसे बिना सोचे समझे लागू किया गया, तो इसके लंबे समय तक गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिन्हें बाद में ठीक करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

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