बलगम नहीं खून से होगी टीबी की जांच, 16 साल के छात्र ने खोजा नया तरीका
न्यूयॉर्क के ग्रेट नेक के एक 16 साल के किशोर जिन ने एक नया ब्लड टेस्ट M-CATCH बनाया है। यह टेस्ट क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिंड्रोमिक रिपीट्स (CRISPR) तकनीक का इस्तेमाल करके ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) का पता लगाता है, जिसमें दवा-प्रतिरोधी प्रकार भी शामिल हैं।
आम बलगम (स्पूटम) टेस्ट के विपरीत इस टेस्ट में केवल ब्लड सैंपल की जरूरत होती है। इससे उन लोगों के लिए जांच काफी आसान हो जाती है, जो बलगम नहीं दे पाते। उसके इस काम के लिए उसे 2026 का डेविडसन फेलोशिप और 50,000 डॉलर (करीब 47 लाख रुपये) की स्कॉलरशिप मिली है।
जल्दी चल सकेगा बीमारी का पता
M-CATCH टेस्ट CRISPR गाइड RNAs और एक माइक्रोफ्लुइडिक्स चिप का इस्तेमाल करता है। यह एक ही बार में टीबी और दवा-प्रतिरोध का जल्दी पता लगा लेता है।
इस टेस्ट को बड़े पैमाने पर जांच करने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि यह ज्यादा व्यावहारिक हो। खासकर ऐसी जगहों पर जहां आधुनिक लैब नहीं हैं, वहां भी ज्यादा लोगों की जांच हो सकेगी।
स्विम टीम के कप्तान भी हैं जिन
इस शानदार टेक्नोलॉजी को बनाने के साथ ही जिन अपने स्कूल की स्विम टीम के कप्तान भी हैं। वे अपने DECA चैप्टर के सह अध्यक्ष भी हैं और उन्होंने प्रोजेक्ट लाइफ की सह-स्थापना भी की है।
इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य शिक्षा को बेहतर बनाना और बोन मैरो रजिस्ट्री तक लोगों की पहुंच बढ़ाना है। जिन यह साबित कर रहे हैं कि लैब के अंदर और बाहर दोनों जगहों पर आप एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं।