UN के जैव विविधता लक्ष्यों को हासिल करने में काफी पीछे हैं सरकारें
एक शोध से पता चला है कि सरकारें 2030 तक दुनिया की कम से कम 30 प्रतिशत जमीन और समुद्र में जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) की सुरक्षा और संरक्षण के संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक बड़े लक्ष्य को पूरा करने में काफी पीछे रह जाएंगी। 2022 के आखिर में तय हुए कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क के तहत, लगभग 200 देशों ने '30 बाय 30' लक्ष्य पर सहमति जताई और दशकों से हो रहे जैव-विविधता के नुकसान को पलटने के लिए हर साल कम से कम 200 अरब डॉलर (करीब 19,000 अरब रुपये) जुटाने का वादा किया।
इस लक्ष्य के तहत 2030 तक पृथ्वी की 30 भूमि और 30 फीसदी महासागरों को सुरक्षित रखने का इरादा था। 2022 के बाद भले ही देशों ने कुछ नए संरक्षित क्षेत्र बनाए हैं, लेकिन यह बढ़ोतरी उम्मीद से काफी कम है। फिलहाल धरती का करीब 20 फीसदी हिस्सा और महासागरों का केवल 10 फीसदी हिस्सा ही संरक्षित है।
आवश्यकता से बहुत कम मिली राशि
रिपोर्ट में वित्तीय संसाधनों की भारी कमी पर चिंता जताई गई है। समुद्री संरक्षण के लिए केवल 1.8 अरब डॉलर (करीब 170 अरब रुपये) मिल पा रहे हैं, जबकि वास्तव में 16 अरब डॉलर (करीब 1,500 अरब रुपये) की जरूरत है।
यही नहीं, जिन 10 फीसदी समुद्री क्षेत्रों को सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाया गया है, उनमें से भी केवल 3.5 फीसदी ही प्रभावी रूप से संरक्षित माने गए।
अगर, तुरंत कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो UN के जैव विविधता से जुड़े कोई भी लक्ष्य 2030 तक पूरे नहीं हो पाएंगे।