डीपफेक और AI कंटेंट पर सरकार की सख्ती, सोशल मीडिया कंपनियों के लिए आया नया नियम
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बने भ्रामक कंटेंट पर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। भारत सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर IT एक्ट 2000 के तहत संशोधित IT नियम लागू किए हैं। सरकार का कहना है कि फर्जी वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरें और नकली ऑडियो से समाज, कानून व्यवस्था और लोकतंत्र को गंभीर नुकसान हो रहा है। इसी वजह से अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ा दी गई है।
परिभाषा
डीपफेक और सिंथेटिक कंटेंट की साफ परिभाषा
नए नियमों में डीपफेक और सिंथेटिक मीडिया की स्पष्ट और कानूनी परिभाषा दी गई है। ऐसे किसी भी वीडियो, फोटो, ऑडियो या टेक्स्ट को नियमों के दायरे में लाया गया है जो कंप्यूटर, AI या ऑटोमेटेड टूल से बनाया, बदला या प्रस्तुत किया गया हो। अगर ऐसा कंटेंट किसी व्यक्ति, घटना या बयान को झूठे तरीके से असली दिखाता है, तो उसे भ्रामक, खतरनाक और कानून के खिलाफ माना जाएगा।
जिम्मेदारी
प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी क्या होगी?
नियमों के अनुसार सोशल मीडिया कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट की पहचान करना अनिवार्य होगा। उन्हें यूजर्स को साफ और स्पष्ट रूप से बताना होगा कि कौन-सा कंटेंट AI से बना है। प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक या फर्जी कंटेंट पर लेबल लगाना और जरूरत पड़ने पर तुरंत उसे हटाना होगा। अगर किसी यूजर या सरकारी एजेंसी की शिकायत मिलती है, तो 3 घंटे के भीतर कार्रवाई करना अनिवार्य किया गया है।
समय-सीमा
तेज कार्रवाई और समय-सीमा तय
केंद्र सरकार ने अब कंटेंट हटाने की समय-सीमा को और सख्त बना दिया है। गंभीर मामलों में सूचना मिलने के बाद तुरंत कंटेंट को ब्लॉक या हटाना होगा। खासतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, बच्चों की सुरक्षा, महिलाओं की गरिमा और चुनाव से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। नियमों में यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर कानून के तहत संबंधित व्यक्ति या अकाउंट की पहचान साझा करनी होगी।
नियम
नियम न मानने पर क्या सजा होगी?
अगर कोई सोशल मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म इन नए नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी। इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म को कानूनी जिम्मेदारी से कोई छूट नहीं मिलेगी। इसके अलावा जुर्माना, कानूनी कार्रवाई, अकाउंट सस्पेंड या स्थायी रूप से ब्लॉक करने जैसे सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं। भारत सरकार ने साफ किया है कि ये नए नियम 20 फरवरी, 2026 से पूरे देश में लागू होंगे।