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गूगल ने 1 अरब एंड्रॉयड फोन में दी हैकिंग की चेतावनी, जानिए क्या है वजह
गूगल ने 1 अरब एंड्रॉयड फोन में हैकिंग की चेतावनी दी है

गूगल ने 1 अरब एंड्रॉयड फोन में दी हैकिंग की चेतावनी, जानिए क्या है वजह

Feb 08, 2026
03:38 pm

क्या है खबर?

दिग्गज टेक कंपनी गूगल ने एंड्रॉयड 12 या उससे पुराने वर्जन पर चलने वाले डिवाइसों को अब सुरक्षा अपडेट नहीं मिलेंगे। इस फैसले के चलते अनुमानित 42.1 फीसदी एंड्रॉयड फोन नए मैलवेयर और स्पाइवेयर हमलों के खतरे में आ गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, केवल 57.9 फीसदी डिवाइस ही एंड्रॉयड 13 या उससे नए वर्जन पर चल रहे हैं। 2021 या उससे पहले लॉन्च हुए करीब 1 अरब फोन अभी भी पुराने सॉफ्टवेयर पर चल रहे हैं।

खतरा 

क्या है एंड्रॉयड फोनों में खतरा?

एंड्रॉयड फोन पर होने वाला मैलवेयर हमले से यूजर नेम और पासवर्ड चुराए जा सकते हैं या बैंकिंग और ट्रेडिंग ऐप्स तक पहुंच प्राप्त की जा सकती है। मैलवेयर मैसेज और ऑथेंटिकेशन कोड को भी इंटरसेप्ट कर सकता है। इससे आपके बैंक अकाउंट को खाली किया जा सकता है। यही कारण है कि गूगल ने यूजर्स को ऐसे फोन का उपयोग करने में होने वाली जोखिम को लेकर हिदायत दी है।

जांच 

इस तरह से लगा सकते हैं पता 

आप पता करना चाहते हैं कि आपका एंड्रॉयड फोन पुराने सॉफ्टवेयर पर चला रहा है या नहीं। इसके लिए 'सेटिंग्स' खोलें और 'अबाउट फोन' देखने के लिए स्क्रॉल करें और इसमें एंड्रॉयड वर्जन देखें। अगर, आपका फोन एंड्रॉयड 12 या उससे पुराने वर्जन पर है और अपग्रेड नहीं हो सकता है तो इसका मतलब है कि इसे अब गूगल से सुरक्षा अपडेट नहीं मिल रहे हैं। कंपनी की सलाह है कि ऐसे फोन को बदल देना चाहिए।

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उपाय 

इस तरह से कर सकते हैं सुरक्षित 

गूगल का कहना है कि प्ले प्रोटेक्ट एंड्रॉयड 7 और उसके बाद के वर्जन पर काम करता है, जिससे मैलवेयर स्कैनिंग और अपडेटेड थ्रेट सिग्नेचर मिलते हैं। कंपनी के एक प्रवक्ता ने फोर्ब्स को बताया कि जिन डिवाइसों में यह सपोर्ट नहीं करता उनमें भी 'रियल-टाइम मैलवेयर स्कैनिंग' की सुविधा उपलब्ध है। इसके बावजूद प्ले प्रोटेक्ट सिस्टम-लेवल सिक्योरिटी पैच की कमी को पूरा नहीं कर सकता, जो जटिल हमलों को रोकने के लिए बेहद जरूरी हैं।

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नीति 

अपडेट को लेकर क्या है गूगल की नीति?

एंड्रॉयड को गूगल विकसित करता है, लेकिन पिक्सल लाइनअप के अलावा फोन निर्माताओं द्वारा अपडेट जारी करने के समय और तरीके पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। सैमसंग, शाओमी, ओप्पो, वीवो, मोटोरोला और अन्य सभी कंपनियां अपने-अपने अपडेट शेड्यूल खुद तय करती हैं और अक्सर कुछ ही वर्षों के बाद डिवाइस को बंद कर देती हैं। इसके विपरीत ऐपल हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों को नियंत्रित करता है, जिससे वह पुराने आईफोन को नियमित रूप से अपडेट जारी कर पाता है।

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