अब AI की मदद से तेज हो गई साइबर हमलों की रफ्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ मशहूर ऐप्स चलाने में ही काम नहीं आ रहा, बल्कि ये साइबर हमलों को भी बहुत तेज और ज्यादा शातिर बना रहा है।
गूगल की थ्रेट इंटेलिजेंस से जुड़े शैन हंटली बताते हैं कि हैकर्स अब साइबर ऑपरेशन के कई पड़ावों पर AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें टारगेट ढूंढने से लेकर मैलवेयर बनाने और बेहद विश्वसनीय लगने वाले फर्जीवाड़े को अंजाम देने तक सब शामिल है।
वे AI को एक ऐसी रफ्तार देने वाली ताकत मानते हैं, जो खतरों की गति इतनी बढ़ा देती है कि बचाव करने वालों के पास प्रतिक्रिया देने के लिए भी बहुत कम समय बचता है।
फिशिंग कम हुई, AI से हो रहे हैं बड़े हमले
बेहतर फिल्टर होने के कारण साधारण फिशिंग ईमेल अब कम हो गए हैं, लेकिन हमलावर AI की मदद से नए तरीके खोज रहे हैं। वे सिस्टम में सेंध लगाने, ज्यादा चालाकी भरी सोशल इंजीनियरिंग स्कीमें बनाने और नई कमजोरियों का तुरंत फायदा उठाने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सिर्फ एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में ही हाल के एक तिहाई हमलों में तकनीकी एक्सप्लॉइट्स का इस्तेमाल हुआ, वहीं वॉयस फिशिंग और चोरी किए गए क्रेडेंशियल का हिस्सा क्रमशः 11 और 9 फीसदी रहा।
हंटली ने कहा, "अब हमारे पास पैच (सुरक्षा अपडेट) करने के लिए दिनों का समय नहीं है।" साइबर अपराध अब कंप्यूटर की रफ्तार से चल रहा है।