गूगल डीपमाइंड के कर्मचारी मांग रहे AI के खतरों पर बोलने की आजादी
लंदन में गूगल डीपमाइंड के कर्मचारी नॉन-डिसपैरजमेंट क्लॉज हटाने की मांग कर रहे हैं। यह ऐसी शर्तें हैं, जो उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े खतरों के बारे में खुलकर बोलने से रोकती हैं, भले ही वे कंपनी छोड़ चुके हों।
कर्मचारियों का कहना है कि आजीवन लागू रहने वाले ये समझौते इस बात पर ईमानदारी से बातचीत नहीं होने देते कि AI समाज पर कैसे असर डाल सकता है? वे इसे पारदर्शिता का एक बड़ा मुद्दा भी मानते हैं।
आलोचना के बाद डीपमाइंड ने की समीक्षा
पूर्व कर्मचारी सोफिया लिगुओरी ने जब सार्वजनिक रूप से गूगल के मिलिट्री AI की आलोचना की तो स्टाफ ने अपने कॉन्ट्रैक्ट्स की बारीकी से जांच की।
इसी दौरान उन्हें ये प्रतिबंधात्मक क्लॉज मिले। कुछ कर्मचारियों ने तो इसकी तुलना 1984 में जीने जैसी स्थिति से की। भले ही गूगल का कहना है कि पूर्व कर्मचारियों और नए भर्ती होने वालों पर अब ये नियम लागू नहीं होंगे, लेकिन मौजूदा कर्मचारी अब भी चाहते हैं कि सारे प्रतिबंध हटा दिए जाएं। इससे वे AI के भविष्य और इसके संभावित खतरों पर खुलकर चर्चा कर पाएंगे।