नकली कागजात से फर्जी दावों तक, 2.9 लाख रिफंड क्लेम की AI से जांच करेगी सरकार
क्या है खबर?
केंद्र सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग धोखाधड़ी के मामलों की जांच के लिए करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत बिना दावे वाले शेयरों, लाभांश और मैच्योर हो चुकी जमा रकम को वापस पाने के लिए आए आवेदनों की जांच की जाएगी। निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण निधि प्राधिकरण (IEPFA) के पास ऐसे करीब 2.9 लाख आवेदन हैं। फिलहाल इनमें से ज्यादातर की जांच कर्मचारी खुद करते हैं।
दस्तावेज
फर्जी दस्तावेजों और गलत दावों पर रहेगी नजर
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाला राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग इस काम के लिए 12 AI सेवाएं शुरू करने की योजना बना रहा है।
सरकारी दस्तावेज में धोखाधड़ी के करीब 28 तरीके बताए गए हैं। इनमें नकली पहचान पत्र, बदले हुए दस्तावेज और रकम में बदलाव करके दोबारा जमा किए गए दावे शामिल हैं।
कई मामलों में मृत निवेशक के परिवार से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच करनी होगी, ताकि गलत व्यक्ति को पैसा न मिले।
जांच
एक ही जानकारी से कई दावे करने वालों की भी जांच
प्रस्तावित व्यवस्था नकली मृत्यु प्रमाण पत्र, गलत हस्ताक्षर वाले अनापत्ति प्रमाण पत्र और दूसरे कानूनी वारिसों की जानकारी छिपाने जैसे मामलों की पहचान करने में मदद करेगी।
इसके अलावा, एक ही शेयर के लिए कई दावे, अलग-अलग पैन नंबरों से जुड़ा एक मोबाइल नंबर और कई आवेदनों में एक ही ईमेल का इस्तेमाल भी जांच के दायरे में होगा।
सिस्टम दस्तावेजों की तुलना सरकारी रिकॉर्ड से करेगा और एक जैसी जानकारी वाले संदिग्ध आवेदनों को सामने लाएगा।
अन्य
दावे पर अंतिम फैसला सरकारी अधिकारी ही करेंगे
नई व्यवस्था हर आवेदन का संक्षिप्त विवरण तैयार करेगी और अधिकारी को जांच में मदद देने वाले सुझाव भी देगी।
हालांकि, AI किसी आवेदन को मंजूर या खारिज नहीं करेगा और न ही खुद किसी को धोखाधड़ी का दोषी बताएगा। अंतिम फैसला सरकारी अधिकारी ही लेंगे। योजना को लागू करने के लिए 4 महीने का समय रखा गया है।
इसके बाद 12 महीने तक इसका संचालन होगा। जरूरत पड़ने पर इस अवधि को 2 बार और बढ़ाया जा सकेगा।