सोशल मीडिया पर दिवाली ऑफर के नाम पर ठगी, इन बातों का रखें ध्यान
क्या है खबर?
दिवाली पर अपनों के लिए उपहार खरीदने के लिए कई लोग इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लेते हैं। यहां आकर्षक छूट, एक के साथ एक मुफ्त सामान और सस्ते उत्पादों के विज्ञापन दिखाई देते हैं, लेकिन हर ऑफर असली नहीं होता। कई बार ठग नकली दुकानों और पेज के जरिए लोगों को फंसाते हैं। ग्राहक भुगतान कर देते हैं, लेकिन सामान नहीं मिलता और कुछ समय बाद विक्रेता अपना पेज भी हटा देता है।
कैशबैक
नकली कैशबैक और ऐप के जरिए हो सकती है ठगी
ठग नकली कैशबैक और रिफंड का लालच देकर लोगों को धोखाधड़ी वाले भुगतान लिंक भेजते हैं।
ऐसे लिंक पर बैंक की जानकारी या UPI पिन डालने से अकाउंट से पैसे कट सकते हैं। इसके अलावा, दिवाली के ऑफर के नाम पर नकली ऐप डाउनलोड करने के लिए भी कहा जाता है।
अनजान सोर्स से ऐसे ऐप डाउनलोड करने पर मोबाइल में खतरनाक सॉफ्टवेयर आ सकता है, जो निजी जानकारी चुरा सकता है और आपकी गतिविधियों पर नजर रख सकता है।
बोनस
सरकारी बोनस और AI के नाम पर भी धोखाधड़ी
व्हाट्सऐप पर प्रधानमंत्री के नाम से 8,000 रुपये का दिवाली बोनस देने का मैसेज भी फैलाया गया है।
यह दावा फर्जी है और इसके साथ दिया गया लिंक निजी जानकारी चुराने वाली वेबसाइट पर ले जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ठग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और लीक हुई निजी जानकारी का इस्तेमाल कर नकली मैसेज और वेबसाइट तैयार कर रहे हैं।
ऐसे मैसेज असली जैसे दिखते हैं, इसलिए किसी भी लिंक पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच जरूरी है।
वजह
त्योहारों में ठग क्यों बढ़ा रहे हैं अपनी गतिविधियां?
त्योहारों के दौरान ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल भुगतान बढ़ने से ठगों को लोगों को निशाना बनाने के ज्यादा मौके मिलते हैं।
इस समय ग्राहक जल्दी में सस्ते ऑफर तलाशते हैं और अनजान विक्रेताओं से भी खरीदारी करते हैं। ठग नकली डिलीवरी मैसेज, बैंक अधिकारी बनकर फोन और फर्जी ग्राहक सेवा नंबरों के जरिए लोगों को फंसाते हैं।
केवल भरोसेमंद वेबसाइट से खरीदारी करें और किसी के साथ OTP, UPI पिन या बैंक की जानकारी साझा न करें।
बचाव
ऑनलाइन खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान
खरीदारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट और ऐप का इस्तेमाल करें।
सोशल मीडिया पर किसी विक्रेता से सामान लेने से पहले उसकी पहचान, ग्राहक समीक्षाएं और वापसी की शर्तें जांचें। अनजान मैसेजेस में आए लिंक से ऐप डाउनलोड न करें। पैसे पाने के नाम पर कभी UPI पिन न डालें, क्योंकि इसका इस्तेमाल भुगतान करने के लिए होता है।
किसी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी तुरंत बैंक को दें। साइबर ठगी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।