गूगल प्ले स्टोर पर फिर नजर आने लगे नकली डिजिलॉकर ऐप, जानिए कैसे रहें सुरक्षित
क्या है खबर?
गूगल प्ले स्टोर पर एक बार फिर डिजिलॉकर के फर्जी ऐप्स भी नजर आने लगे हैं। सुरक्षा शोधकर्ताओं और यूजर्स ने असली जैसे दिखने वाले नकली ऐप्स की पहचान की है। ये ऐप्स दस्तावेज सेव नहीं करते हैं, बल्कि इनका उद्देश्य जानकारी चुराना और बैंक खातों से पैसे निकालना है। डिजिलॉकर एक वास्तविक और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली सरकारी सेवा है। लोग इस पर शक नहीं करते। आइये जानते हैं इस तरह के ऐप्स से कैसे बचें।
रूप
दिखने में लगती हैं असली जैसी
नकली डिजिलॉकर ऐप्स में तिरंगे का इस्तेमाल होता है। इनमें अशोक चक्र का प्रतीक होता है। इनके नाम असली ऐप से मिलते-जुलते हैं कि पहली नजर में पहचाने नहीं जा सकते हैं। कुछ ऐप्स को हजारों बार डाउनलोड किया जा चुका है। कुछ के तो ऐसे रिव्यू भी हैं, जिन्हें देखकर तुरंत संदेह नहीं होता। अधिकतर ऐप्स SMS, कॉल, स्क्रीन रिकॉर्डिंग ऐसी अनुमतियां मांगते हैं और आधार कार्ड, पैन कार्ड या फोन नंबर से सत्यापित करने के लिए कहते हैं।
नुकसान
नकली ऐप्स करते हैं ये काम
इनमें से कई ऐप्स चुपचाप आपके OTP मैसेज पढ़ लेते हैं। कुछ आपकी स्क्रीन की निगरानी करते हैं और आपके द्वारा टाइप की गई हर चीज को रिकॉर्ड कर लेते हैं। कुछ मामलों में लोगों को नकली UPI या बैंकिंग पेज पर भेज दिया जाता है, जो देखने में बिल्कुल असली पेजों जैसे लगते हैं। आपको लगता है कि आप लॉग-इन कर रहे हैं, लेकिन असल में आप अपनी जानकारी दे रहे होते हैं, जिससे पैसे गायब हो सकते हैं।
पहचान
ऐसे कर सकते हैं पहचान
असली डिजिलॉकर ऐप भारत सरकार के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस विभाग द्वारा पब्लिश किया जाता है। नकली ऐप्स का पता लगाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इनके नाम अक्सर थोड़े अटपटे, डेवलपर अकाउंट अजीब और ईमेल एड्रेस आधिकारिक नहीं लगते। अनुमतियां भी महत्वपूर्ण संकेत हैं। किसी दस्तावेज ऐप को आपके SMS पढ़ने या आपकी स्क्रीन पर क्या है? यह देखने की आवश्यकता नहीं होती है। डिजिलॉकर कभी भी आपका UPI पिन या बैंकिंग पासवर्ड नहीं मांगेगा।
बचाव
बचाव करने के लिए करें ये उपाय
अगर, आपको लगता है कि आपने कोई नकली ऐप इंस्टॉल कर लिया है तो उसे दोबारा न खोलें। अपना इंटरनेट बंद कर इसे अनइंस्टॉल कर दें। फटाफट अपने बैंक और UPI ऐप्स की जांच करें। किसी दूसरे डिवाइस से अपने पासवर्ड बदल दें और अपने बैंक को कॉल करके हुई घटना की जानकारी दें। अगर, आपके पैसे गायब हो गए हैं तो साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। ऐसे मामलों में तेजी बहुत जरूरी है।