ESA और ISRO ने अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए हाथ मिलाया
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 9 सितंबर से पेरिस में शुरू हुए इंटरनेशनल स्पेस समिट में अहम बातचीत कर रहे हैं।
इस समिट में दोनों संस्थाएं मानव अंतरिक्ष उड़ान और दूसरे ग्रहों की खोज में मिलकर काम करने पर विचार-विमर्श कर रही हैं। ESA के महानिदेशक जोसेफ एशबैकर और ISRO के अध्यक्ष डॉ वी नारायणन जैसे दोनों एजेंसियों के बड़े अधिकारी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। उनका खास फोकस भविष्य के मिशनों के लिए एक साझा रणनीति बनाने पर है, जिसमें चांद पर होने वाली खोज भी शामिल है।
गगनयान को तकनीकी मदद पर समझौता
भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान को ESA ने तकनीकी मदद देने का फैसला किया है। इसके तहत ग्राउंड स्टेशन सपोर्ट मुहैया कराया जाएगा और इस संबंध में एक टेक्निकल इम्प्लीमेंटिंग प्लान (TIP) पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं।
इस मिशन का मुख्य लक्ष्य 3 अंतरिक्ष यात्रियों को ऑर्बिट में भेजना है, जहां वे करीब 3 दिन अंतरिक्ष में गुजारेंगे और फिर सुरक्षित धरती पर लौट आएंगे। दोनों एजेंसियां भारत के आने वाले वीनस ऑर्बिटर मिशन पर भी मिलकर काम करने पर विचार कर रही हैं। यह मिशन 2028 में लॉन्च करने की योजना है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय टीमों के सहयोग से शुक्र ग्रह की गहराई से जांच की जाएगी।