EOS-05 सैटेलाइट की सेहत ठीक, पहला गगनयान मिशन इसी साल होगा लॉन्च- ISRO प्रमुख
क्या है खबर?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज अपने महत्वपूर्ण GSLV-F17 मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए 2,367 किलोग्राम वजनी EOS-05 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेज दिया है। इस सफलता के साथ ISRO ने देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक और अहम उपलब्धि जोड़ी है। मिशन के बाद अब वैज्ञानिकों का ध्यान सैटेलाइट की स्थिति और आगे के काम पर है। ISRO ने इस साल के अंत तक पहले बिना क्रू वाले गगनयान मिशन को लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है।
सेहत
तय कक्षा में बिल्कुल सही स्थिति में सैटेलाइट
ISRO चेयरमैन वी नारायणन ने बताया कि GSLV-F17 ने EOS-05 को उसकी तय सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सही तरीके से पहुंचा दिया है।
सैटेलाइट की स्थिति सामान्य है और उसके सोलर पैनल भी सफलतापूर्वक खुल गए हैं। EOS-05 के अंतरिक्ष में स्थापित होने के बाद अब इसे आगे की प्रक्रिया से गुजारा जाएगा।
ऑपरेशनल होने पर यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत की धरती की लगातार निगरानी और इमेजिंग में अहम भूमिका निभाएगा।
गगनयान मिशन
गगनयान मिशन पर तेजी से चल रहा काम
EOS-05 की सफलता के बाद ISRO अब गगनयान कार्यक्रम के पहले बिना क्रू वाले मिशन पर तेजी से काम कर रहा है।
वी नारायणन ने कहा कि इसकी तैयारियां व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही हैं और लॉन्च इसी कैलेंडर साल के अंत से पहले करने का लक्ष्य है। यह मिशन भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
बिना इंसान के इस परीक्षण के जरिए अंतरिक्ष यान और उससे जुड़ी प्रणालियों की क्षमता जांची जाएगी।
लक्ष्य
इस साल छह और लॉन्च का लक्ष्य
ISRO के मुताबिक, GSLV-F17 भारत के GSLV की 19वीं उड़ान और श्रीहरिकोटा से 107वां मिशन था।
नारायणन ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में छह और लॉन्च करने की योजना है, जिसमें नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 भी शामिल है। EOS-05 की ऑपरेशनल लाइफ नौ साल बताई गई है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि यह स्पाई सैटेलाइट नहीं है। मिशन की सफलता को वैज्ञानिकों, उद्योग और अकादमिक संस्थानों की संयुक्त मेहनत का नतीजा बताया गया है।