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धरती पेरिस समझौते की 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान सीमा पार करने की ओर, UN की चेतावनी
धरती के तापमान को लेकर UN की बड़ी चेतावनी

धरती पेरिस समझौते की 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान सीमा पार करने की ओर, UN की चेतावनी

Sep 02, 2026
12:23 pm

क्या है खबर?

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की नई रिपोर्ट में धरती के बढ़ते तापमान को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले कुछ वर्षों में दुनिया का औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा पार कर सकता है। यह पेरिस समझौते में तय अहम सीमा है। देशों के मौजूदा जलवायु वादे पूरी तरह लागू होने के बावजूद तापमान औद्योगिक दौर से पहले के स्तर से 1.8 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो सकता है।

असर

बढ़ते तापमान से क्या होगा असर?

तापमान बढ़ने का सीधा असर ग्लेशियर और बर्फीली चादरों पर पड़ सकता है।

UNE की रिपोर्ट के अनुसार, 2100 तक दुनिया के ग्लेशियर अपने वजन का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा खो सकते हैं। इससे समुद्र का स्तर 9 से 12.5 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। कई इलाकों में पानी की उपलब्धता भी बदल सकती है।

इसके अलावा, समुद्री बर्फ, पर्माफ्रॉस्ट और बर्फ से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

खतरा

गर्मी और जंगल की आग बढ़ने का खतरा

रिपोर्ट में कहा गया है कि तापमान बढ़ने के साथ दुनिया में बहुत ज्यादा गर्मी की लहरें और जंगल की आग बढ़ सकती हैं।

समुद्र का स्तर तेजी से बढ़ने और कोरल रीफ जैसे समुद्री तंत्र के खत्म होने का खतरा भी बढ़ेगा। ग्रीनलैंड और पश्चिमी अंटार्कटिका की बर्फीली चादरों में बड़े बदलाव आ सकते हैं।

अमेजन के जंगल और समुद्र की बड़ी धाराओं में भी ऐसे बदलाव का खतरा बढ़ सकता है, जिन्हें वापस बदलना मुश्किल होगा।

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जरुरी कदम

तापमान रोकने के लिए क्या करना होगा?

UNEP ने कहा है कि तापमान बढ़ने की रफ्तार कम करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तुरंत कटौती करनी होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, पहले तापमान को बढ़ने से रोकना और फिर धीरे-धीरे नीचे लाने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए मीथेन समेत दूसरी गैसों के उत्सर्जन में कमी जरूरी है।

इसके साथ ही, देशों को नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने और हवा से कार्बन हटाने जैसे सुरक्षित उपायों पर भी काम करना होगा।

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अन्य

मौजूदा जलवायु योजनाएं क्यों कम पड़ रही हैं?

रिपोर्ट के अनुसार, देशों ने उत्सर्जन कम करने के जो वादे किए हैं, वे अभी पर्याप्त नहीं हैं।

नए राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को पूरी तरह लागू करने के बाद भी उत्सर्जन में जरूरी कमी नहीं आएगी। मौजूदा नीतियों के आधार पर 2030 तक वैश्विक उत्सर्जन में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है।

UNEP ने कहा कि जलवायु संकट को सीमित करने के लिए देशों को अपने वादों से आगे बढ़कर ज्यादा तेजी और मजबूती से कार्रवाई करनी होगी।

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