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पृथ्वी के अंदर छिपा है महासागरों से कई गुना ज्यादा हाइड्रोजन, नई शोध में हुआ खुलासा
पृथ्वी के अंदर छिपा है हाइड्रोजन का बड़ा भंडार

पृथ्वी के अंदर छिपा है महासागरों से कई गुना ज्यादा हाइड्रोजन, नई शोध में हुआ खुलासा

Feb 11, 2026
07:17 pm

क्या है खबर?

वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक शोध में पता लगाया है कि हमारी पृथ्वी के अंदर महासागरों से भी अधिक मात्रा में हाइड्रोजन मौजूद हो सकता है। नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, पृथ्वी के कोर में नौ से लेकर 45 महासागरों के बराबर हाइड्रोजन हो सकता है। इस महत्वपूर्ण शोध में बताया गया है कि यह मात्रा पृथ्वी के कुल कोर वजन का लगभग 0.36 से 0.7 प्रतिशत तक हो सकती है।

शोध

कैसे किया गया यह शोध?

शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के कोर जैसी स्थिति बनाने के लिए प्रयोगशाला में विशेष उपकरणों का उपयोग किया। उन्होंने लोहे को बहुत अधिक दबाव और तापमान पर पिघलाया, जैसा कि पृथ्वी के अंदर होता है। इसके बाद एटम स्तर पर जांच करने वाली तकनीक से हाइड्रोजन की मात्रा मापी गई। वैज्ञानिकों ने पाया कि हाइड्रोजन लोहे, सिलिकॉन और ऑक्सीजन के साथ खास तरीके से जुड़ा हुआ था, जिससे उसके अनुमान को समझना संभव हुआ।

मतलब

इस खोज का क्या मतलब है?

इस बड़े खोज से यह संकेत मिलता है कि पृथ्वी ने अपना अधिकतर पानी ग्रह के बनने के शुरुआती समय में ही प्राप्त कर लिया था। पहले कुछ वैज्ञानिक मानते थे कि पानी बाद में धूमकेतुओं के टकराने से आया होगा। अगर यह नया अनुमान सही है, तो इसका मतलब है कि पृथ्वी की बनावट और जीवन की शुरुआत के बारे में हमारी समझ और अधिक साफ हो सकती है।

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महत्व

जीवन के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?

वैज्ञानिकों के अनुसार, हाइड्रोजन जीवन के लिए जरूरी तत्वों में से एक है। यह कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, सल्फर और फॉस्फोरस जैसे अन्य जरूरी तत्वों के साथ मिलकर जीवन की बुनियाद बनाता है। अगर पृथ्वी के कोर में बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन मौजूद है, तो यह समझने में मदद मिल सकती है कि जीवन के लिए जरूरी तत्व पृथ्वी पर कैसे पहुंचे और कैसे फैले। इससे ग्रहों की उत्पत्ति और जीवन के विकास पर नई जानकारी मिल सकती है।

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सवाल

अभी भी बाकी हैं कुछ सवाल

वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस अनुमान की पुष्टि के लिए और शोध की जरूरत है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि असली मात्रा इससे ज्यादा भी हो सकती है। प्रयोग के दौरान नमूनों से कुछ हाइड्रोजन निकल सकता है, जिससे गणना में फर्क आ सकता है। हालांकि, इन सभी अधूरे सवालों के बावजूद यह अध्ययन पृथ्वी के अंदरूनी हिस्से और उसके विकास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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