टेक कंपनियां कर रही AI को प्रशिक्षित करने के लिए लोगों के डाटा का इस्तेमाल
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा इस बात को लेकर आलोचना का सामना कर रहे हैं कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम्स को प्रशिक्षण देने के लिए लोगों के निजी डाटा का बेतहाशा इस्तेमाल कर रहे हैं।
मिथोस 5 मॉडल पर लगी हालिया रोक से साफ होता है कि यह प्रक्रिया कितनी जटिल हो सकती है। ये कंपनियां लोगों के मैसेज, वीडियो और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों जैसे तरह-तरह का डाटा इकट्ठा कर रही हैं। इससे दुनियाभर में लोगों की निजता और नैतिक मूल्यों को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।
सहमति के बिना हो रहा इस्तेमाल
ज्यादा डाटा जुटाने के लिए ये बड़ी तकनीकी कंपनियां पब्लिशर्स और क्रिएटर्स के साथ समझौते कर रही हैं, लेकिन इसमें अक्सर यूजर्स की सहमति को दरकिनार कर दिया जाता है।
लोगों की निजी जानकारी बिना बताए या पूरी पारदर्शिता के बिना इस्तेमाल की जा सकती है और कभी-कभी इस डाटा के इस्तेमाल से ऑप्ट-आउट (खुद को बाहर करना) करना भी बहुत मुश्किल हो जाता है, जिससे लोगों के पास अपने डाटा पर कोई नियंत्रण नहीं रहता।
सरकार से सख्त नियमों की मांग
लोगों की निजी जानकारी को किस तरह से संभाली जा रही है, इस बात को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। इसी वजह से कई लोग सरकारों से सख्त नियम बनाने की अपील कर रहे हैं, ताकि AI के लगातार विस्तार के इस दौर में यूजर्स की निजता सुरक्षित रखी जा सके।