जलवायु परिवर्तन के कारण दुनियाभर में मूंगा का दायरा 9.5 फीसदी घटा
दुनियाभर के मूंगा चट्टान (कोरल रीफ) संकट में हैं। 31 अगस्त को जारी हुई ग्लोबल कोरल रीफ मॉनिटरिंग नेटवर्क (GCRMN) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 1980-2009 के दौरान कठोर मूंगों का औसत कवरेज 30.2 फीसदी था, जो 2020-2024 में घटकर केवल 27.3 फीसदी रह गया है। यह 9.5 फीसदी की सापेक्ष गिरावट दर्शाती है।
इस गंभीर स्थिति की मुख्य वजह जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा है। इसके कारण समुद्री हीटवेव और ब्लीचिंग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे मूंगों के लिए दोबारा पनपना बेहद मुश्किल हो जाता है।
औसत मूंगा कवरेज 30.2 फीसदी से गिरकर 27.3 फीसदी हो गया है और सबसे तेज गिरावट 2023-24 में रिकॉर्ड की गई है।
कैरेबियन में 43.3 फीसदी घटा मूंगों का दायरा
जहां पश्चिमी हिंद महासागर जैसे कुछ इलाकों में मूंगों की स्थिति में सुधार देखा गया, वहीं कैरेबियन जैसे क्षेत्रों ने अपने मूंगा कवरेज का 43.3 फीसदी हिस्सा खो दिया। प्रशांत क्षेत्र में भी 18.3 फीसदी की कमी आई है।
मूंगा चट्टानों के लिए ठीक होने की अवधि भी पहले के 10 साल से घटकर अब लगभग 5 या 6 साल रह गई है, जिससे हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकट से निपटने के लिए फौरन कदम उठाने की जरूरत है।
इसमें ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करना और स्थानीय समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा करना शामिल है। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि मूंगा चट्टान लगभग एक अरब लोगों की आजीविका का सहारा हैं और समुद्री जीवों की कम से कम 25 फीसदी प्रजातियों को आश्रय देते हैं।