Loading...
IIT-मद्रास के छात्रों को गेम बनाने की ट्रेनिंग देगी क्राफ्टन, शुरू की नई पहल
IIT-मद्रास के छात्रों को गेम बनाने की ट्रेनिंग देगी क्राफ्टन

IIT-मद्रास के छात्रों को गेम बनाने की ट्रेनिंग देगी क्राफ्टन, शुरू की नई पहल

Sep 01, 2026
11:17 am

क्या है खबर?

दक्षिण कोरिया की गेमिंग कंपनी क्राफ्टन ने भारत में गेम डेवलपमेंट टैलेंट को बढ़ावा देने की नई पहल शुरू की है। कंपनी ने 1 सितंबर को KIGI एकेडमी लॉन्च की, जिसका उद्देश्य छात्रों को गेम बनाने का व्यावहारिक अनुभव देना है। क्राफ्टन का कहना है कि भारत में गेमिंग का बड़ा बाजार होने के बावजूद यहां कम गेम बनते हैं। नई पहल के जरिए कंपनी छात्रों को प्रोग्रामिंग के साथ डिजाइन, UI और यूजर एक्सपीरियंस जैसी जरूरी चीजें भी सिखाएगी।

पहला बैच

IIT-मद्रास के साथ शुरू होगा पहला बैच

KIGI एकेडमी का पहला बैच IIT-मद्रास के साथ शुरू होगा और इसमें 30 छात्र शामिल होंगे।

यह छह महीने का प्रोग्राम होगा, जिसमें चार महीने IIT-मद्रास में ट्रेनिंग और दो महीने क्राफ्टन इंडिया के बेंगलुरु ऑफिस में रेजिडेंसी होगी। इसका पूरा खर्च कंपनी उठाएगी।

प्रोग्राम तीसरे और चौथे साल के बैचलर छात्रों और सभी सालों के डुअल-डिग्री छात्रों के लिए खुला रहेगा। हालांकि, रेजिडेंसी के लिए केवल तीसरे साल के छात्र ही चुने जाएंगे।

ट्रेनिंग

मोबाइल गेम बनाने की मिलेगी ट्रेनिंग

प्रोग्राम में छात्रों को मोबाइल गेम बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी।

शुरुआती चरण में यूनिटी इंजन के जरिए गेम डेवलपमेंट की बुनियादी जानकारी मजबूत की जाएगी और छात्र हर हफ्ते नए बिल्ड पर काम करेंगे। रेजिडेंसी में छोटी टीमें गेम आइडिया को खेलने लायक वर्जन में बदलेंगी।

इसमें गेम के मुख्य फीचर, डिजाइन और अनुभव पर काम होगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को क्राफ्टन इंडिया में नौकरी का मौका भी मिल सकता है।

ADVERTISEMENT

बाजार

भारत में तेजी से बढ़ रहा गेमिंग बाजार

क्राफ्टन के मुताबिक, KIGI एकेडमी को आगे दूसरे कॉलेजों तक भी ले जाया जा सकता है।

कंपनी भारत में गेम बनाने वाले युवाओं की संख्या बढ़ाना चाहती है। क्राफ्टन पहले से KIGI इनक्यूबेटर चलाती है और भारतीय गेमिंग, ईस्पोर्ट्स तथा टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में निवेश कर रही है।

कंपनी के लोकप्रिय BGMI गेम के कारण भारत में उसकी मजबूत मौजूदगी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का वीडियो गेम बाजार 2025 में 17 प्रतिशत बढ़कर 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया।

ADVERTISEMENT