चीन ने लॉन्च किया नया सैटेलाइट नेटवर्क, अंतरिक्ष के मलबे पर कैसे रखेगा नजर?
क्या है खबर?
चीन ने अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे पर नजर रखने और अलग-अलग कक्षाओं में मौजूद वस्तुओं की निगरानी के लिए अपने पहले व्यावसायिक सैटेलाइट नेटवर्क की शुरुआत कर दी है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, 120 सैटेलाइट वाले गैंडे कॉन्स्टेलेशन का पहला सैटेलाइट उत्तर-पश्चिम चीन से लिजियन-1 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इस परियोजना को 2030 से पहले तीन चरणों में पूरा करने की योजना बनाई गई है, जिससे निगरानी क्षमता लगातार मजबूत होती जाएगी।
काम
कैसे करेगा अंतरिक्ष की चौबीसों घंटे निगरानी?
इस नेटवर्क का पहला सैटेलाइट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कंप्यूटर से लैस है, जिससे वह कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ लगातार निगरानी कर सकेगा।
यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में मौजूद मलबे और अन्य वस्तुओं का पता लगाएगा, उनकी गतिविधियों पर नजर रखेगा और टक्कर की आशंका होने पर समय रहते जानकारी देने में मदद करेगा।
इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर यह अपनी कक्षा बदलकर नजदीक से भी निगरानी करने में सक्षम होगा और आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया भी देगा।
सैटेलाइट
पहले चरण में होंगे 14 सैटेलाइट
इस परियोजना के पहले चरण में 14 सैटेलाइट शामिल होंगे, जिसे LX630 नाम दिया गया है।
इनका उद्देश्य पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद वस्तुओं की पहचान, निगरानी और उनका पूरा रिकॉर्ड तैयार करना है।
चीन का मानना है कि इससे अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन बेहतर होगा, टक्कर के खतरे कम होंगे और उसके तेजी से बढ़ रहे व्यावसायिक सैटेलाइट नेटवर्क की सुरक्षा भी मजबूत होगी, साथ ही नई अंतरिक्ष सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।
तैयारी
बढ़ते स्पेस मलबे से निपटने की तैयारी
रिपोर्ट के अनुसार, अंतरिक्ष में एक सेंटीमीटर से बड़े 10 लाख से अधिक मलबे के टुकड़े मौजूद हैं, जो अंतरिक्ष यानों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
ये टुकड़े करीब 7.9 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चलते हैं, इसलिए टक्कर होने पर भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
हाल के वर्षों में चीन के कई अंतरिक्ष मिशन भी ऐसे मलबे से प्रभावित हुए हैं, जिसके बाद निगरानी क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।