चीन का पश्चिम इलाका बन रहा नए डाटा सेंटर का गढ़, जानिए क्या है वजह
चीन अपने डाटा सेंटर्स को पूर्वी शहरों की भीड़-भाड़ से निकालकर अंदरूनी मंगोलिया जैसे कम आबादी वाले पश्चिमी इलाकों में शिफ्ट कर रहा है।
इसके पीछे एक बड़ी वजह सस्ती रिन्यूएबल ऊर्जा और खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल करके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की अगली जनरेशन को ताकत देना है।
2022 में 'डाटा पूर्व में, कंप्यूटिंग पश्चिम में' नाम की एक योजना शुरू हुई थी। इसके बाद से बीजिंग से करीब 350 किलोमीटर दूर बसा उलानकाब शहर इस डिजिटल बदलाव का एक बड़ा केंद्र बन गया है।
उलानकाब बन रहा नया ठिकाना
AI को ज्यादा कंप्यूटिंग शक्ति की जरूरत पड़ रही है, इसलिए उलानकाब में नए डाटा सेंटरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
ब्लूमबर्ग NEF के मुताबिक, चीन के आधे से ज्यादा डाटा सेंटर प्रोजेक्ट अब उत्तर या पश्चिम में हैं। 2028 तक, उत्तर और उत्तर-पश्चिमी चीन डाटा प्रोसेसिंग पावर के मामले में बीजिंग और शंघाई को भी पीछे छोड़ सकता है। डीपसीक और Z.AI जैसी टेक कंपनियां सस्ती बिजली, सर्वर के लिए मुफीद ठंडा मौसम और ढेर सारी खाली जमीन की वजह से यहां का रुख कर रही हैं।
मंजूरी और ऊर्जा के लिए बनाए कड़े नियम
इस तेजी से हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए बीजिंग ने अब कुछ नए नियम बनाए हैं। इन नियमों के तहत, प्रोजेक्ट्स के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मंजूरी लेना जरूरी होगा। ऊर्जा दक्षता और रिन्यूएबल ऊर्जा के इस्तेमाल को लेकर भी सख्त शर्तें होंगी।
बीजिंग यह तय करना चाहता है कि ये नए डिजिटल केंद्र जिम्मेदारी से आगे बढ़ें और कहीं ऐसा न हो कि सब कुछ बेकाबू हो जाए।