अग्निकुल समुद्र में उतारेगा रॉकेट बूस्टर, स्पेस-X जैसी रीयूजेबल तकनीक पर चल रहा काम
चेन्नई का स्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस अपने मिशन 02 की तैयारी में जुटा है। यह मिशन भारत का पहला ऐसा प्रयास है, जिसमें समुद्र से रॉकेट बूस्टर को वापस लाया जाएगा।
उनके अग्निबाण रॉकेट में एक खास बात है। इसके पहले स्टेज को ऐसे डिजाइन किया गया है कि यह समुद्र में सुरक्षित उतरेगा और फिर इसे दोबारा इस्तेमाल के लिए वापस लाया जा सकेगा।
दूसरी तरफ, रॉकेट का ऊपरी हिस्सा कक्षा में ही रहेगा, जिसे बाद में फिर से इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह तरीका अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे को कम करने में भी मदद करेगा।
मिशन 01 में किया 3D प्रिंटेड इंजन का प्रदर्शन
मिशन 02 से पहले अग्निकुल ने 2024 में अपना मिशन 01 सफलतापूर्वक पूरा किया था। इस मिशन 01 ने भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में कई नई शुरुआत की थीं।
इसमें पहली बार कंपनी के 3D प्रिंटेड इंजन का सफल परीक्षण भी हुआ था। अपने इस नए मिशन के जरिए अग्निकुल भारत को रियूजेबल रॉकेट टेक्नोलॉजी में स्पेस-X जैसी दुनिया की बड़ी कंपनियों की कतार में ला खड़ा कर रहा है।
इससे अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने की लागत घटेगी और आम लोगों के लिए अंतरिक्ष यात्रा आसान बनेगी। यह सारा काम उनके भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान (IIT) मद्रास रिसर्च पार्क में बने बेस से हो रहा है।