स्वास्थ्य में AI के इस्तेमाल के लिए माधवी ने की MBBS के साथ IIT की पढ़ाई
ज्यादातर छात्र यह तय करने में ही कई साल लगा देते हैं कि उन्हें मेडिकल की पढ़ाई करनी चाहिए या इंजीनियरिंग की, लेकिन BVS माधवी के लिए इसका जवाब बहुत आसान था कि जब दोनों चीजें सीखी जा सकती हैं तो किसी एक को क्यों चुना जाए।
आंध्रा मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई के दौरान माधवी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास में डाटा साइंस और प्रोग्रामिंग में BS डिग्री के लिए भी दाखिला ले लिया।
उनका बड़ा लक्ष्य है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके स्वास्थ्य सेवा को और बेहतर बनाना, जिसमें बेहतर जांच से लेकर मरीजों की देखभाल तक शामिल है।
अस्पताल की ड्यूटी और कोडिंग प्रोजेक्ट्स के बीच संतुलन साधते हुए माधवी यह दिखा रही हैं कि तकनीक और चिकित्सा का यह संगम स्वास्थ्य क्षेत्र में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।
निमोनिया पहचानने वाला टूल बनाया
माधवी ने पहले ही छाती के एक्स-रे और डीप लर्निंग का इस्तेमाल करके निमोनिया पहचानने वाला एक टूल बना लिया है, जिसकी सटीकता करीब 90 फीसदी थी।
इस काम के लिए उन्हें एक ऑल-विमेन स्टार्टअप आइडियाथॉन में पहचान मिली। उन्होंने फॉरेंसिक लिप-पैटर्न एनालिसिस के लिए AI पर भी काम किया है और एक ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में अंतरिक्ष स्वास्थ्य सेवा के लिए 3D बायोप्रिंटिंग पर बात भी की है।
आज वो एनफेरेंस में जूनियर क्लिनिकल साइंटिस्ट हैं और कैंसर रिसर्च में AI का इस्तेमाल कर रही हैं। यह बताता है कि चिकित्सा और तकनीक का मेल स्वास्थ्य सेवा की सबसे जटिल चुनौतियों से भी निपट सकता है।