अंतरिक्ष में AI डाटा सेंटर बनाना 100 गुना तक महंगा, गूगल ने बताई बड़ी चुनौती
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेंटर बनाने के लिए तकनीकी कंपनियां अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। अब कुछ कंपनियां इन्हें अंतरिक्ष में बनाने की संभावनाएं भी तलाश रही हैं, लेकिन यह योजना काफी महंगी पड़ सकती है। गूगल के मुताबिक, अंतरिक्ष में AI डाटा सेंटर बनाने की लागत धरती पर ऐसे केंद्र तैयार करने के मुकाबले 100 गुना तक ज्यादा हो सकती है। विकल्प के तौर पर देखा जा रहा यह विचार फिलहाल खर्च के कारण बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सलाह
गूगल ने पहले धरती पर संसाधन इस्तेमाल करने की दी सलाह
गूगल में डाटा सेंटर ऊर्जा विभाग की प्रमुख अमांडा पीटरसन कोरियो ने कहा कि कंपनियों को अंतरिक्ष में डाटा सेंटर बनाने से पहले धरती पर उपलब्ध विकल्पों का बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए।
उन्होंने द इन्फॉर्मेशन से बातचीत में कहा कि अंतरिक्ष की ओर बढ़ने से पहले धरती पर मौजूद सभी संभावनाएं देखनी चाहिए।
उनके मुताबिक, अमेरिका में AI ढांचे के विस्तार के लिए पर्याप्त बिजली है, लेकिन सरकारी मंजूरी मिलने में देरी से काम प्रभावित हो रहा है।
तैयारी
अंतरिक्ष में डाटा सेंटर बनाने की तैयारी में गूगल
लागत को लेकर चिंता के बावजूद गूगल अपने प्रोजेक्ट सनकैचर के जरिए अंतरिक्ष में AI डाटा सेंटर बनाने की संभावना पर काम कर रही है।
इसके तहत ऐसे सैटेलाइट्स का नेटवर्क तैयार करने की योजना है, जिनमें कंपनी के AI चिप लगाए जाएंगे। ये सैटेलाइट सौर पैनलों से बिजली बनाकर अंतरिक्ष में जानकारी प्रोसेस करेंगे।
कंपनी का लक्ष्य ऐसे कई सैटेलाइट को आपस में जोड़कर एक ऐसा नेटवर्क बनाना है, जो अंतरिक्ष में डाटा सेंटर की तरह काम कर सके।
प्रोजेक्ट
क्या है गूगल का प्रोजेक्ट सनकैचर?
गूगल का पहला सनकैचर सैटेलाइट करीब एक रेफ्रिजरेटर के आकार का है और 1 अक्टूबर को अंतरिक्ष में पहुंचा था।
इसमें 4 TPU चिप लगे हैं और यह 1KW तक बिजली बना सकता है। 30 अक्टूबर को गूगल ने बताया कि सैटेलाइट ने अपना पहला AI परीक्षण पूरा कर लिया है। इसमें जेम्मा 4 मॉडल से अंतरिक्ष पर कविता लिखने को कहा गया और सैटेलाइट ने जवाब धरती पर भेजा।
गूगल 2027 में 2 सैटेलाइट का परीक्षण करेगी।
अन्य
अंतरिक्ष में निवेश की तैयारी में दूसरी कंपनियां
अंतरिक्ष में डाटा सेंटर बनाने की दौड़ में गूगल के अलावा कई बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं।
एलन मस्क की स्पेस-X 2027 के अंत तक अपने ऑर्बिटल AI सिस्टम का परीक्षण करना चाहती है। जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजन भी प्रोजेक्ट सनराइज पर काम कर रही है।
चीन ने अगले 5 वर्षों में गीगावाट स्तर का अंतरिक्ष आधारित कंप्यूटिंग ढांचा बनाने की योजना बताई है। हालांकि, इन सभी परियोजनाओं के सामने निर्माण और संचालन की भारी लागत बड़ी चुनौती रहेगी।