मंगल ग्रह पर कम्युनिकेशन नेटवर्क बनाने के लिए ब्लू ओरिजन ने जीता नासा का कॉन्ट्रैक्ट
क्या है खबर?
नासा ने मंगल ग्रह पर संचार व्यवस्था मजबूत करने के लिए ब्लू ओरिजन को एक बड़ा काम सौंपा है। कंपनी मंगल की कक्षा में भेजे जाने वाला एक खास ऑर्बिटर बनाएगी। इसके जरिए मंगल पर काम कर रहे अंतरिक्ष यानों से जरूरी जानकारी धरती तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इस प्रोजेक्ट की संभावित कीमत 70 करोड़ डॉलर (लगभग 6,800 करोड़ रुपये) है। ब्लू ओरिजन को 31 दिसंबर, 2028 तक ऑर्बिटर तैयार करके नासा के लिए उपलब्ध कराना होगा।
योजना
क्या है योजना?
ब्लू ओरिजन का ऑर्बिटर मंगल के आसपास कक्षा में रहेगा और वहां मौजूद अंतरिक्ष यानों के साथ संपर्क बनाए रखने में मदद करेगा।
इन यानों से मिलने वाली वैज्ञानिक जानकारी, तस्वीरें और दिशा से जुड़ी जानकारी इसके जरिए भेजी जा सकेगी। मिशन से जुड़े जरूरी मैसेज भी धरती तक पहुंचाए जा सकेंगे।
आसान शब्दों में समझें तो यह ऑर्बिटर मंगल और धरती के बीच जानकारी पहुंचाने के लिए एक पुल की तरह काम करेगा और संचार व्यवस्था को बेहतर बनाएगा।
लाभ
भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों को होगा फायदा
नासा आने वाले समय में इंसानों को मंगल तक भेजने की तैयारी कर रहा है।
इसके लिए पहले चांद पर इंसानों से जुड़े मिशनों के जरिए जरूरी अनुभव हासिल किया जा रहा है।
आर्टेमिस कार्यक्रम इसी तैयारी का हिस्सा है। मंगल पर इंसानों को भेजने से पहले वहां से लगातार जानकारी हासिल करना जरूरी होगा। इसके लिए मजबूत संचार व्यवस्था चाहिए होगी।
नया नेटवर्क भविष्य में मंगल पर भेजे जाने वाले अंतरिक्ष यानों और यात्रियों के मिशन में काम आएगा।
चुनौती
ब्लू ओरिजन के लिए चुनौती
ब्लू ओरिजन के सामने इस दौरान एक दूसरी चुनौती भी है।
मई में कंपनी के न्यू ग्लेन रॉकेट के लॉन्चपैड में धमाका हुआ था, जिससे उसे नुकसान पहुंचा। कंपनी के CEO ने कहा था कि इसकी मरम्मत 2026 के अंत तक पूरी हो सकती है।
हालांकि, नासा एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड इसाकमैन ने अनुमान लगाया कि लॉन्चपैड 2028 तक ही फिर से इस्तेमाल के लिए तैयार हो पाएगा। इससे कंपनी के रॉकेट कार्यक्रम पर असर पड़ सकता है।