भारतीय मूल के वैज्ञानिक समेत 3 को मिला रसायन विज्ञान का वुल्फ खिताब
भारतीय मूल के शंकर बालासुब्रमण्यम ने डेविड क्लेनरमैन और पास्कल मेयर के साथ मिलकर रसायन विज्ञान के लिए 2026 का वुल्फ पुरस्कार जीत लिया है।
उनके काम की वजह से DNA सीक्वेंसिंग कहीं ज्यादा तेज और सस्ती हो गई है। यह खोज कैंसर के इलाज पर शोध, आनुवंशिक बीमारियों का पता लगाने और हमारे जीन्स के काम को समझने के लिए बहुत अहम मानी जा रही है।
सोलेक्सा सीक्वेंसिंग का किया आविष्कार
बालासुब्रमण्यम और क्लेनरमैन ने सोलेक्सा सीक्वेंसिंग नाम की एक तकनीक विकसित की। इस तरीके से फ्लोरेसेंट टैग का इस्तेमाल करके एक साथ लाखों DNA के टुकड़ों को पढ़ा जा सकता है।
यह तकनीक 1990 के दशक के आखिर में उनके शोध से ही निकलकर सामने आई थी। इसकी वजह से 1998 में सोलेक्सा कंपनी की नींव रखी गई, जिसे बाद में इलुमिना ने खरीद लिया, ताकि दुनियाभर की प्रयोगशालाएं इसका इस्तेमाल कर सकें।
मेयर ने इस प्रक्रिया को और भी ज्यादा आसान और सुलभ बनाने में अहम भूमिका निभाई। इस काम से प्रेसिजन मेडिसिन जैसे नए रास्ते खुल गए हैं।