गूगल ने विशाखापट्टनम में AI हब के कारण बिजली-पानी की चिंताओं को किया दूर
गूगल अपना नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब विशाखापट्टनम में बना रहा है। यह गूगल के 15 अरब डॉलर (करीब 1,425 अरब रुपये) के 'भारत AI शक्ति' प्लान का एक अहम हिस्सा है।
हाल के दिनों में पानी और बिजली की खपत को लेकर इस प्रोजेक्ट पर कई सवाल उठाए गए हैं। इस प्रोजेक्ट में डाटा सेंटर, AI इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स से जुड़ा ढांचा और बिजली के लिए जरूरी सुविधाएं शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि गूगल AI हब का निर्माण तभी आगे बढ़ाया जाए, जब इसके लिए सभी जरूरी कानूनी और पर्यावरणीय अनुमति मिल जाएं।
हालांकि, कोर्ट ने निर्माण कार्य रोकने से मना कर दिया है, लेकिन यह साफ किया है कि हर जरूरी अनुमति मिलने के बाद ही काम आगे बढ़ेगा।
कंपनी ने चिंताओं के लिए बताए ये समाधान
लोगों की चिंताओं को कम करने के लिए गूगल ने कहा है कि वे पानी वाले कूलिंग सिस्टम के बजाय एयर-कूलिंग का इस्तेमाल करेंगे। इससे पानी की खपत एक आम ऑफिस बिल्डिंग जितनी ही रहेगी, उससे ज्यादा नहीं होगी।
कंपनी ने यह भी वादा किया है कि 2030 तक वे कूलिंग में इस्तेमाल न होने वाले पानी का 120 फीसदी हिस्सा वापस लौटाएंगे।
बिजली की बात करें तो गूगल ने 275.4MW रिन्यूएबल पावर के लिए समझौते कर लिए हैं। इसके साथ ही, कंपनी स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर में भी निवेश करेगी। गूगल का कहना है कि इस हब से कुशल नौकरियां पैदा होंगी और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को तेज रफ्तार मिलेगी।