भारत में नहीं हो रहा GPU की पूरा क्षमता इस्तेमाल, विदेशों को बेचने पर विचार
भारत के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में एक अजीबो-गरीब स्थिति बन गई है। एक तरफ कुछ ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) का पूरा इस्तेमाल नहीं हो रहा, वहीं सरकार अब इस अप्रयुक्त क्षमता को विदेशों में बेचने पर विचार कर रही है।
दूसरी तरफ, भारतीय स्टार्टअप और शोधकर्ता सस्ती कंप्यूटिंग पावर के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें हमेशा ऊंची लागत और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर का सामना करना पड़ता है।
हैरानी की बात यह है कि 10,372 करोड़ रुपये के इंडियाAI मिशन के तहत 14 कंपनियों को सस्ती दर पर यह सुविधा मुहैया कराने के लिए चुना गया था।
केवल छोटे प्रोजेक्ट के काम आ रहे GPU
भारत में अभी लगभग 30,000 GPU मौजूद हैं, लेकिन ये केवल छोटे AI प्रोजेक्ट के लिए ही इस्तेमाल हो पाते हैं। बड़े और जटिल AI कामों के लिए ये उतने कारगर नहीं हैं। यही वजह है कि कई स्टार्टअप अंत में सस्ते एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) का सहारा लेते हैं।
जॉहनिक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ससंक चिलमकूर्ती का कहना है कि रियायती दरों पर संसाधन मिल पाना आसान नहीं है। इसकी वजह यह है कि निजी सेवा प्रदाता ग्राहकों तक पहुंच बनाने से ज्यादा अपने मुनाफे पर ध्यान देते हैं।
ससंक यह भी बताते हैं कि असल दिक्कत यह है कि इन GPU का मालिकाना हक सरकार के पास नहीं है, जिसकी वजह से सरकार इन्हें बांट नहीं पाती।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर, सरकार बेहतर नीतियां बनाए और सही दाम तय करे तो भारत अपनी AI क्षमता का और बेहतर ढंग से इस्तेमाल कर पाएगा।