तिरंगा मार्च के दौरान आज कनॉट प्लेस पर क्या-क्या हुआ?
क्या है खबर?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का आह्वान किया था। उनके साथ तमाम छात्र संगठन और सिविल सोसाइटी को आना था, लेकिन उससे पहले पुलिस ने दिपके और छात्र नेता नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया। दिनभर कनॉट प्लेस पर सन्नाटा पसरा रहा, लेकिन शाम को हलचल बढ़ गई। पूरा दिन यहां क्या हुआ? आइए, जानते हैं।
सख्ती
कनॉट प्लेस पर सुबह क्या हुआ?
CJP, छात्र संगठन और सिविल सोसाइटी के आह्वान के बाद नई दिल्ली नगर निगम (NDMC) ने गुरुवार शाम को ही एक आदेश जारी कर सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर के लिए बंद कर दिया था।
इसके बाद, शुक्रवार सुबह से ही कनॉट प्लेस पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों का कड़ा पहरा दिखा। यहां कुछ दुकानें खुली थी, जबकि कई बंद थीं।
कनॉट प्लेस में लोगों की भीड़ भी कम दिखी। पिछले दिनों के मुकाबले पुलिस बल कम था।
शाम
शाम होते-होते बढ़ गई सख्ती
दिनभर थोड़ी ढील के बाद, जैसे-जैसे शाम के 5 बजने वाले थे, वैसे-वैसे पुलिस की सख्ती बढ़ती चली गई। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पूरे सेंट्रल को घेरकर मानव शृंखला बना ली।
कनॉट प्लेस के अंदरूनी और बाहरी सर्कल, दोनों जगह पुलिस और अर्धसैनिक जवानों की संख्या बढ़ा दी गई थी। हालांकि, इसके बावजूद यहां धीरे-धीरे तिरंगा मार्च के समर्थन में लोग जुटने लगे थे।
पुलिस इनको न तो हटा रही थी और न ही हिरासत में ले रही थी।
हिरासत
पुलिस ने दिपके को नोटिस दिया
जैसे-जैसे शाम करीब आ रही थी, वैसे-वैसे पुलिस तिरंगा मार्च को टालने की कोशिश कर रही थी। पुलिस अधिकारियों ने रानी झांसी मार्ग स्थित एक आवास में दिपके से जाकर मुलाकात भी की।
अधिकारियों ने दिपके को नोटिस सौंपा और धारा 163 का हवाला देते हुए तिरंगा मार्च टालने का अनुरोध किया। दिपके को कार्रवाई की चेतावनी तक दी गई।
हालांकि, दिपके ने साफ मना कर दिया कि वह कोई प्रदर्शन करने नहीं जा रहे हैं।
हिरासत
दिपके और बोरा के हिरासत के बाद बढ़ा तनाव
शाम 5 बजने से पहले दिपके आवास से निकलकर कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क जाने लगे, तभी पुलिस की टीम ने उन्हें सड़क पर ही रोक लिया।
दिपके ने उनसे कहा कि वह अकेले ही कनॉट प्लेस जा रहे हैं। उन्होंने पुलिस से पूछा कि वे किस कानून के तहत उनको रोक रहे हैं।
तभी एक पुलिस अधिकारी ने उनको एहतियातन हिरासत की जानकारी दी और जबरन पुलिस वाहन में बैठा लिया। प्रदर्शनकारियों ने वाहन को रोकने की कोशिश की।
मार्च
नेहा बोरा को मंडी हाउस के पास हिरासत में लिया
सेंट्रल पार्क के पास सख्ती होने के कारण नेहा बोरा ने अपनी योजना बदली और सीधे मंडी हाउस की तरफ तिरंगा मार्च लेकर पहुंच गईं।
हालांकि, नेपाल दूतावास के पास ही उनको हिरासत में ले लिया गया। उनको जिस वाहन में बैठाया गया, उसके आगे प्रदर्शनकारी लेट गए।
उनके साथ, वामपंथी छात्र संगठन के अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया। अभी ये नहीं बताया गया है कि दिपके और बोरा को पुलिस कहां ले गई है।
मार्च
कनॉट प्लेस पर पुलिस ने एक घंटे तक मार्च पर कार्रवाई नहीं की
दिपके और बोरा के हिरासत में लिए जाने के बाद कई प्रदर्शनकारी और छात्र तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस पहुंचे और मार्च भी निकाला।
हालांकि, पुलिस ने किसी को भी न तो मार्च निकालने से मना किया और न ही हिरासत में लिया। करीब एक घंटे से ज्यादा समय ज्ञानेश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगते रहे।
बताया जा रहा है कि मार्च शांतिपूर्ण होने और सबके हाथ में तिरंगा होने से पुलिस ने ज्यादा जबरदस्ती नहीं की।
हिरासत
7 बजे के बाद 150 लोग हिरासत में
पुलिस ने शाम साढ़े 6 बजे तक कनॉट प्लेस पर तिरंगा लेकर नारेबाजी करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन 7 बजे के बाद लोगों को हिरासत में लेना शुरू किया।
इस दौरान पुलिस ने पालिका बाजार के पास नारेबाजी कर रहे 150 लोगों को हिरासत में लेकर अपनी वैन में भर लिया और दूर ले गए।
RTI कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज को भी पुलिस ने कई लोगों के साथ हिरासत में लिया।
आलोचना
दिपके और बोरा की हिरासत की आलोचना
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने दिपके और बोरा की हिरासत का विरोध किया है।
ममता और स्टालिन ने इस अमानवीय और गैरकानूनी बताया। केजरीवाल ने इसे स्पष्ट तानाशाही बताया।
ध्रुव राठी ने आरोप लगाया, "लोगों के प्रति अपनी नफरत में, नरेंद्र मोदी ने अब भारतीय ध्वज से भी नफरत करना शुरू कर दिया है।"