आदित्य-L1 ने यूरोप के मिशन के साथ मिलकर खोला सूर्य के विस्फोटों का राज
क्या है खबर?
भारत के आदित्य-L1 मिशन और यूरोप के प्रोबा-3 अंतरिक्ष यान ने मिलकर सूर्य से निकलने वाले शक्तिशाली विस्फोटों के बारे में नई जानकारी जुटाई है। वैज्ञानिकों ने दोनों मिशनों से मिले आंकड़ों का अध्ययन कर समझने की कोशिश की कि ये विस्फोट शुरुआती दौर में कैसे विकसित होते हैं। इनसे मिलने वाली जानकारी भविष्य में उपग्रहों, संचार व्यवस्था और पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्ष पर पड़ने वाले असर का अनुमान लगाने में मदद कर सकती है।
अध्ययन
सूर्य के विस्फोटों का अध्ययन क्यों जरूरी है?
सूर्य से निकलने वाले विशाल विस्फोटों को कोरोनल मास इजेक्शन कहा जाता है।
इनमें आवेशित कण और चुंबकीय पदार्थ बड़ी मात्रा में अंतरिक्ष में फैलते हैं। जब इनका रुख पृथ्वी की ओर होता है, तो ये चुंबकीय तूफान पैदा कर सकते हैं। इससे उपग्रहों, संचार और दिशा बताने वाली प्रणालियों पर असर पड़ सकता है।
वैज्ञानिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि ऐसे विस्फोट सूर्य के पास कैसे शुरू होते हैं और उनकी ऊर्जा कैसे बदलती है।
मिशन डाटा
दोनों मिशनों के उपकरणों से मिला अलग-अलग डाटा
आदित्य-L1 भारत का पहला समर्पित सूर्य अध्ययन मिशन है।
इसे 2 सितंबर, 2023 को लॉन्च किया गया था और यह 6 जनवरी, 2024 को सूर्य-पृथ्वी के बीच L1 बिंदु के आसपास पहुंचा। वहीं, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने प्रोबा-3 को 5 दिसंबर 2024 को लॉन्च किया था।
इसके 2 अंतरिक्ष यान मिलकर कृत्रिम सूर्यग्रहण बनाते हैं। दोनों मिशनों के उपकरण सूर्य के बाहरी वातावरण को अलग-अलग तरीकों से देखते हैं, जिससे वैज्ञानिकों को अधिक जानकारी मिलती है।
अंतर
2 विस्फोटों की गति और ऊर्जा में मिला अंतर
वैज्ञानिकों ने 14 और 16 सितंबर, 2025 को दर्ज 2 सौर विस्फोटों का अध्ययन किया।
इनमें से एक करीब 645 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से आगे बढ़ा, जबकि दूसरे की गति लगभग 145 किलोमीटर प्रति सेकंड थी। अध्ययन में दोनों विस्फोटों की ऊर्जा और घनत्व में अंतर मिला।
वैज्ञानिकों के अनुसार, दोनों मिशनों से प्राप्त आंकड़े कई मामलों में एक-दूसरे से मेल खाते हैं। इससे सूर्य के विस्फोटों को समझने और उनके प्रभावों का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी।