वैज्ञानिकों ने इंजेक्शन की मदद से अल्जाइमर के इलाज में हासिल की कामयाबी
अमेरिका के शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर रोग से प्रभावित चूहों में केवल एक इंजेक्शन की मदद से याददाश्त वापस लाने में कामयाबी हासिल की है।
इलाज के बाद इन चूहों ने कुछ ही सप्ताह में भूलभुलैया में बेहतर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया और उनके घोंसला बनाने के कौशल में भी सुधार दिखा। अल्जाइमर रोग के शोध के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है।
इसकी मुख्य वजह 'नैनो-इरेजर' नाम का एक नैनोपार्टिकल उपचार था। यह उपचार एक प्रोटीन (PTBP1) को निष्क्रिय कर देता है, जो आमतौर पर दिमाग में नए न्यूरॉन बनने की प्रक्रिया को रोकता है। PTBP1 के निष्क्रिय होने से दिमाग में नए न्यूरॉन बन पाते हैं।
एंटीबॉडी नए न्यूरॉन बनने को देता है बढ़ावा
'नैनो-इरेजर' ब्लड-ब्रेन बैरियर को पार करके PTBP1-विशिष्ट एंटीबॉडी पहुंचाता है। ये एंटीबॉडी सहायक कोशिकाओं को नए न्यूरॉन में बदलने और न्यूरॉन की संख्या बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं।
यह तरीका मौजूदा उपचारों से बिल्कुल अलग है क्योंकि वे केवल बीमारी की गति धीमी करने की कोशिश करते हैं, जबकि यह वास्तव में हुए नुकसान को ठीक करता है।
इस शोध के वरिष्ठ लेखक पेईशेंग जू ने बताया, "केवल एक इंजेक्शन के बाद ही हमने देखा कि जिन चूहों का इलाज किया गया था, उनका व्यवहार उन चूहों से काफी अलग था, जिनका इलाज नहीं हुआ था।"
अभी इंसानों पर इसका परीक्षण होना बाकी है, लेकिन अगर, यह सफल होता है तो भविष्य में यह अल्जाइमर के इलाज के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकता है।