कैसे AI टूल्स बीमारियों का पता लगाकर उपचार को बना रहे सटीक?
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्वास्थ्य सेवा में बीमारियों की पहचान करने की क्षमता को कई गुना बेहतर बना रहा है। फेफड़ों के कैंसर और रेटिना से जुड़ी बीमारियों की मेडिकल इमेजिंग जैसे क्षेत्रों में AI 95 प्रतिशत से ज्यादा सटीक नतीजे देता है। यह तकनीक बड़े डेटासेट को खंगाल कर उन बारीक पैटर्न को भी पहचान लेती हैं, जिन्हें चिकित्सक शायद न देख पाएं। आइये जानते हैं कैसे AI बीमारियों का पता लगाने में कारगर साबित हो रहा है।
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स्वास्थ्य सेवा में इमेजिंग की आधुनिक तकनीकें
जांच के लिए की जाने वाली इमेजिंग के क्षेत्र में YOLOv11 जैसे एडवांस AI मॉडल ने बहुत ही बढ़िया सटीकता दिखाई है। ये मॉडल बीमारियों के लक्षणों को 96.26 प्रतिशत सटीकता से पहचानते हैं और CT स्कैन पर ट्यूमर का सही जगह पता 95.76 प्रतिशत सटीकता के साथ लगाते हैं। पिछली तकनीकों से बेहतर है, जिन्होंने फेफड़ों के कैंसर का पता लगाने में 98.7 प्रतिशत तक सटीकता हासिल की। इससे पता चलता है कि इसमें कितना बदलाव आ चुका है।
#2
कैंसर की जांच में गलत रिपोर्ट कम करना
AI से चलने वाले सिस्टम ब्रेस्ट कैंसर की जांच के तरीके को बदल रहे हैं, क्योंकि ये गलत पॉजिटिव रिपोर्ट को 37.3 प्रतिशत तक कम कर देते हैं। ये 27.8 प्रतिशत तक गैर-जरूरी बायोप्सी को भी कम करते हैं, जिससे मरीजों का तनाव और खर्च कम होता है। ये ऐसे 49.8 प्रतिशत इंटरवल कैंसर का भी पता लगा लेते हैं, जो पहले छूट जाते थे, जिससे बीमारी की जल्दी पहचान और इलाज संभव हो पाता है।
#3
इंटिग्रेटेड प्लेटफॉर्म से काम करने का तरीका बेहतर बनाना
रामसॉफ्ट के पावरसेवर और ओमेगा AI जैसे प्लेटफॉर्म AI क्षमताओं को रेडियोलॉजी इनफोर्मेशन सिस्टम (RIS) और पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्युनिकेशन सिस्टम (PACS) में जोड़ते हैं। ये प्लेटफॉर्म काम को प्राथमिकता देने वाले टास्क को खुद ही करते हैं और यह पक्का करते हुए कि गंभीर मामलों को सबसे पहले देखा जाए। साथ ही ये निमोनिया के लिए छाती के एक्स-रे की तेजी से जांच करने में भी मदद करते हैं, और 10 सेकंड के भीतर नतीजे देते हैं।
#4
क्लिनिकल स्टडीज से इलाज की सटीकता में सुधार
क्लिनिकल स्टडीज बताती हैं कि स्वास्थ्य सुविधाओं में बीमारियों की पहचान में सटीकता बढ़ाने के लिए AI कितना जरूरी है। AI की भविष्यवाणियों और स्पष्टीकरणों को रोजमर्रा के अभ्यास में शामिल करने से चिकित्सकों ने बीमारियों की पहचान की सटीकता को 73 से बढ़ाकर 77.5 प्रतिशत कर दिया। यह सुधार उन मामलों में ज्यादा देखा गया है, जिनमें अस्पताल में भर्ती मरीज शामिल थे। AI टूल स्वास्थ्यकर्मियों को मार्गदर्शन देते हैं, ताकि वे बेहतर फैसले ले सकें।