AI डॉक्टरों का विकल्प नहीं, उनका सहयोगी बने- मंत्री अनुप्रिया पटेल
क्या है खबर?
AI इम्पैक्ट समिट 2026 में डॉक्टरों की नौकरी पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के खतरे के मुद्दे पर चर्चा हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने साफ कहा कि AI का मकसद डॉक्टरों को बदलना नहीं, बल्कि उनकी मदद करना है। उन्होंने कहा कि मेडिसिन सिर्फ विज्ञान नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और समझ का काम भी है। मशीनें इंसानी हमदर्दी और संवाद की जगह नहीं ले सकतीं, इसलिए AI को सहायक टूल के रूप में देखा जाना चाहिए।
जरूरत
हेल्थकेयर में AI की बढ़ती जरूरत
रॉयल फिलिप्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रॉय जैकब्स ने कहा कि हेल्थ सिस्टम पर बढ़ते बोझ, स्टाफ की कमी और इलाज की जटिलता के कारण AI अब जरूरत बन गया है। उन्होंने कहा कि AI को क्लिनिकल जरूरतों के साथ जोड़ना जरूरी है। सही डाटा, मजबूत सिस्टम और साफ उपयोग के बिना AI कामयाब नहीं होगा। भरोसा बनाए रखने के लिए AI सिस्टम को पारदर्शी और सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
उदाहरण
भारत में AI के उदाहरण
समिट में बताया गया कि भारत में AI-इनेबल्ड मीडिया डिजीज सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल बीमारी पर नजर रखने और जल्दी पहचान करने में हो रहा है। 13 भाषाओं में काम करने वाला यह सिस्टम बीमारियों के ट्रेंड पर नजर रखता है। टीबी जांच में AI आधारित एक्स-रे मशीनों से करीब 16 प्रतिशत ज्यादा मामलों का पता चला है। इलाज के नतीजों को सुधारने वाले AI टूल से खराब परिणाम 27 प्रतिशत तक कम हुए हैं।
अन्य
सिस्टम स्तर पर लागू करने पर जोर
नीति आयोग के सदस्य वी के पॉल ने AI इम्पैक्ट समिट 2026 में कहा कि AI सबके लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवा का रास्ता खोल सकता है, लेकिन इसे सिर्फ छोटे प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रखना चाहिए। मजबूत नियम, डाटा सुरक्षा और पब्लिक-प्राइवेट सहयोग जरूरी है। सभी वक्ताओं ने माना कि AI निगरानी, जांच और फैसले में मदद कर सकता है, पर अंतिम निर्णय इंसान का ही होना चाहिए। इस वजह से AI डॉक्टरों का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक रहेगा।