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AI से बन सकता है नया धर्म, इतिहासकार युवल नोआ हरारी ने की भविष्यवाणी
AI से बन सकता है नया धर्म

AI से बन सकता है नया धर्म, इतिहासकार युवल नोआ हरारी ने की भविष्यवाणी

Feb 18, 2026
06:48 pm

क्या है खबर?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक को लेकर दुनियाभर के विशेषज्ञ अलग-अलग अनुमान लगा रहे हैं। दावोस में निखिल कामथ और इतिहासकार युवल नोआ हरारी के बीच हुई बातचीत में धर्म और AI पर खास चर्चा हुई। कामथ ने सवाल उठाया कि क्या आज के युवाओं के बीच धर्म की भूमिका बदल रही है। हरारी ने कहा कि धर्म खत्म नहीं हो रहा, बल्कि समय के साथ बदल रहा है और अब AI उसके नए दौर को आकार दे सकता है।

असर

धार्मिक ग्रंथों पर AI का असर

हरारी के अनुसार, यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम जैसे कई धर्म पवित्र किताबों को अंतिम अधिकार मानते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक इन ग्रंथों को समझने के लिए इंसानी जानकारों की जरूरत होती थी। लेकिन AI बहुत बड़ी मात्रा में लिखी सामग्री पढ़ और समझ सकता है। भविष्य में लोग पादरी या रब्बी के बजाय AI से धार्मिक सवालों के जवाब ले सकते हैं, जिससे धार्मिक व्याख्या का तरीका बदल सकता है।

भविष्य

AI बनेगा 'जवाब देने वाली किताब'?

हरारी ने कहा कि पवित्र किताबें खुद जवाब नहीं देतीं, इसलिए इंसानी व्याख्याकार की जरूरत पड़ती है। हालांकि, भविष्य में AI एक ऐसी प्रणाली बन सकता है जो सीधे सवालों के जवाब दे। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ युवा पहले ही AI को अपना करीबी दोस्त या मार्गदर्शक मानने लगे हैं। उनके अनुसार, यह इंसानी इतिहास का बड़ा सामाजिक प्रयोग है, जिसके लंबे समय के असर अभी साफ नहीं हैं।

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भविष्यवाणी

क्या AI से नया धर्म जन्म ले सकता है?

हरारी का मानना है कि भविष्य में AI नए धार्मिक ग्रंथ या पंथ भी बना सकता है। उन्होंने कहा कि कई धर्म पहले से ही गैर-इंसानी स्रोत से उत्पत्ति का दावा करते हैं। ऐसे में AI द्वारा लिखी गई किताबें कुछ लोगों को स्वाभाविक लग सकती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी खुद विश्वास की जगह नहीं लेगी, लेकिन यह धार्मिक सोच और मार्गदर्शन के तरीके को जरूर बदल सकती है।

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